Aurum PropTech ने अपने राइट्स इश्यू (Rights Issue) से जुटाए गए फंड का लगभग पूरा इस्तेमाल कर लिया है, लेकिन ₹33.73 करोड़ अभी भी रखे हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन पैसों को करंट अकाउंट में रखा गया, जिस पर निगरानी एजेंसी ने गवर्नेंस (Governance) को लेकर सवाल उठाए हैं।
Aurum PropTech राइट्स इश्यू: ₹33.73 करोड़ फंड का क्या हुआ?
Aurum PropTech लिमिटेड ने 30 जून 2026 तक अपने राइट्स इश्यू (Rights Issue) से मिले पैसों में से ₹33.73 करोड़ का इस्तेमाल नहीं किया है।
निवेशकों के लिए खास बात
कंपनी ने राइट्स इश्यू के जरिए कुल ₹341.72 करोड़ जुटाए थे, जिसमें से ₹303.89 करोड़ को तय उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है। बाकी बचे ₹33.73 करोड़ फिलहाल फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposits) में रखे गए हैं। पहले की रिपोर्ट्स में इन्हें म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में निवेशित बताया गया था, जिसे अब ठीक किया गया है। कॉल पेमेंट्स (Call Payments) के लिए ₹1.45 करोड़ का बकाया है, जिस पर कंपनी ब्याज भी कमा रही है।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
यह रिपोर्ट बताती है कि कंपनी अपने राइट्स इश्यू के तय लक्ष्यों का पालन कर रही है। हालांकि, दो बड़ी बातें चिंता पैदा करती हैं: पहली, एक गवर्नेंस (Governance) का मुद्दा, जहाँ लेन-देन करंट अकाउंट (Current Account) के जरिए हुए, जिससे स्वतंत्र जांच मुश्किल हो गई है। दूसरी, प्रोजेक्ट लागू करने में देरी का एक ऑपरेशनल मुद्दा भी है, क्योंकि ऑब्जेक्टिव्स (Objectives) को 'ऑन-गोइंग' (On-going) दिखाया गया है और कोई तय समय-सीमा नहीं है। इसका मतलब है कि निवेशकों को प्रोजेक्ट पूरे होने की रफ्तार और फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता पर नजर रखनी होगी।
पुरानी कहानी
यह अपडेट राइट्स इश्यू से फंड के इस्तेमाल से जुड़ा है। पिछली निगरानी रिपोर्ट्स में फंड को म्यूचुअल फंड में निवेश करने को लेकर मुद्दे उठाए गए थे, जिन्हें अब सुधारा गया है। यह नई रिपोर्ट 2026 की दूसरी तिमाही के अंत तक की स्थिति बताती है।
अब क्या बदलेगा?
कंपनी ने न इस्तेमाल किए गए फंड को रखने के तरीके में सुधार किया है, अब ये म्यूचुअल फंड की जगह फिक्स्ड डिपॉजिट में हैं। यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन फंड को करंट अकाउंट में मिलाने और प्रोजेक्ट्स के चालू रहने जैसे मुद्दे अभी भी निवेशकों की कड़ी निगरानी में रहेंगे।
जोखिम
निवेशकों को प्रोजेक्ट लागू करने में देरी के जोखिमों से सावधान रहना चाहिए, जिससे समय और लागत बढ़ सकती है। करंट अकाउंट के जरिए फंड के लेन-देन का गवर्नेंस मुद्दा भी जोखिम भरा है, क्योंकि यह मैनेजमेंट और ऑडिटर (Auditor) की क्लासिफिकेशन पर निर्भर करता है, जिससे पारदर्शिता कम हो सकती है।
संदर्भ मेट्रिक्स (समय-सीमा)
- कुल इश्यू साइज: ₹343.56 करोड़
- कुल सब्सक्रिप्शन प्राप्त: ₹341.72 करोड़
- कुल राशि इस्तेमाल हुई: ₹303.89 करोड़
- कुल इस्तेमाल न हुई राशि: ₹33.73 करोड़
- बकाया (कॉल्स): ₹1.45 करोड़
- रिपोर्टिंग अवधि: 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही
