Altius Telecom Infrastructure Trust ने अपने पहले फुल ईयर के नतीजों का ऐलान कर दिया है। कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर ₹24,165 करोड़ हो गया है, जबकि मुनाफा ₹1,106.6 करोड़ रहा। ट्रस्ट अब पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी कर रहा है।
Altius Telecom Infrastructure Trust के सालाना नतीजे
ऑपरेशंस से रेवेन्यू: ₹24,165 करोड़
साल के लिए मुनाफा: ₹1,106.6 करोड़
निवेशकों के लिए खास: इंटीग्रेशन के बाद मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ, लेकिन बड़े ग्राहकों पर ज्यादा निर्भरता जोखिम पैदा करती है।
क्या हुआ?
Altius Telecom Infrastructure Trust, जो भारत का सबसे बड़ा इंडिपेंडेंट टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म है, ने 31 मार्च 2026 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष के नतीजे जारी किए हैं। ट्रस्ट ने ₹24,165 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू और ₹1,106.6 करोड़ का कंसोलिडेटेड मुनाफा दर्ज किया है। यह समिट, क्रेस्ट और एलेवर डिजिटेल को इंटीग्रेट करने के बाद उनका पहला पूरा साल है।
क्यों अहम है ये?
इन नतीजों में कुल इनकम ₹24,426.1 करोड़ तक पहुंच गई, जो पिछले साल के ₹19,623.7 करोड़ से काफी ज्यादा है। वहीं, मुनाफे में भी ₹839.9 करोड़ से बढ़ोतरी हुई है। इस परफॉर्मेंस का श्रेय एलेवर के ऑपरेशंस के पूरे साल के कंसोलिडेशन और पोर्टफोलियो की ऑर्गेनिक ग्रोथ को दिया जा रहा है। ट्रस्ट ने ₹15.6 प्रति यूनिट का डिस्ट्रिब्यूशन (DPU) भी घोषित किया है।
बैकस्टोरी
Altius Telecom Infrastructure Trust, समिट, क्रेस्ट और एलेवर डिजिटेल के इंटीग्रेशन से बना है, जिसका लक्ष्य भारत का सबसे बड़ा इंडिपेंडेंट टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म बनना है। ट्रस्ट टेलीकॉम साइट्स और टेनेंसी का एक बड़ा पोर्टफोलियो ऑपरेट करता है।
अब क्या बदलेगा?
ट्रस्ट के बोर्ड और यूनिटहोल्डर्स ने एक बड़ा कॉर्पोरेट एक्शन मंजूर किया है: ट्रस्ट अब प्राइवेट लिस्टिंग से पब्लिक लिस्टिंग में बदलेगा, जिसके लिए यूनिट्स का पब्लिक ऑफर लाया जाएगा। इस कदम से ट्रस्ट की लिक्विडिटी और मार्केट विजिबिलिटी बढ़ने की उम्मीद है।
ध्यान देने योग्य जोखिम
ट्रस्ट के लिए एक बड़ी चिंता कस्टमर कंसंट्रेशन (ग्राहक एकाग्रता) को लेकर है, जहां तीन बड़े ग्राहक इसके कुल रेवेन्यू का 96% हिस्सा हैं। अगर इनमें से कोई भी बड़ा ग्राहक वित्तीय मुश्किलों का सामना करता है, तो यह एक जोखिम पैदा कर सकता है। इसके अलावा, विभिन्न सब्सिडियरीज़ में GST, इनकम टैक्स और प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े चल रहे मुकदमे संभावित वित्तीय देनदारियों के लिए निगरानी की मांग करते हैं। SEBI द्वारा सरप्लस कैश के उपयोग को लेकर जारी की गई चेतावनी भी रेगुलेटरी जांच का संकेत देती है।
अहम आंकड़े (समय-आधारित)
- कंसोलिडेटेड रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (FY26): ₹24,165 करोड़
- कंसोलिडेटेड EBITDA (FY26): ₹9,947.1 करोड़
- नेट डिस्ट्रिब्यूटेबल कैश फ्लोज़ (NDCF) (FY26): ₹4,761 करोड़
- नेट डेट टू AUM रेश्यो (31 मार्च 2026 तक): 45.23%
- टेलीकॉम साइट्स: 258,000+
- टेनेंसीज़: 315,000+
- टेनेंसी रेश्यो: 1.2x
आगे क्या देखें?
निवेशकों को पब्लिक ऑफर और पब्लिकली लिस्टेड ट्रस्ट में बदलने की योजना की प्रगति पर करीब से नजर रखनी चाहिए। टैक्स लिटिगेशन के नतीजों और मैनेजमेंट की कस्टमर कंसंट्रेशन रिस्क को कम करने की रणनीति पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
