Adhbhut Infrastructure ने जून 2026 तिमाही में बड़ा नुकसान दर्ज किया है। ऑडिटर ने कंपनी की नेट वर्थ खत्म होने के कारण उसके 'गोइंग कंसर्न' यानी चलते रहने की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
Adhbhut Infrastructure के नतीजे
Adhbhut Infrastructure Ltd ने 30 जून, 2026 को समाप्त पहली तिमाही के लिए अपने अनऑडिटेड स्टैंडअलोन वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) पिछले साल की तरह ही ₹0.15 करोड़ रहा। हालांकि, कुल खर्चे बढ़कर ₹0.54 करोड़ हो गए, जो पिछले साल ₹0.49 करोड़ थे। इससे टैक्स से पहले का घाटा (Loss Before Tax) बढ़कर ₹0.39 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹0.33 करोड़ था। नतीजतन, कंपनी का नेट लॉस (Net Loss) भी बढ़कर ₹0.40 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹0.33 करोड़ था। प्रति शेयर आय (EPS) भी घटकर ₹0.36 के घाटे में आ गई, जो पिछले साल ₹0.30 थी।
'गोइंग कंसर्न' पर ऑडिटर की चेतावनी
कंपनी की वित्तीय स्थिति चिंताजनक है। सबसे गंभीर बात यह है कि ऑडिटर M/s Chatterjee & Chatterjee ने 'गोइंग कंसर्न' यानी कंपनी के भविष्य में चलते रहने की क्षमता को लेकर एक 'मटेरियल अनिश्चितता' (Material Uncertainty) जताई है। यह चेतावनी इसलिए दी गई है क्योंकि कंपनी को तिमाही में ₹0.39 करोड़ का टैक्स-पूर्व घाटा हुआ है और 30 जून, 2026 तक ₹25.28 करोड़ का संचित घाटा (Accumulated Losses) हो चुका है, जिसने कंपनी की नेट वर्थ को काफी हद तक खत्म कर दिया है। इन सब वजहों से कंपनी के भविष्य में संचालन जारी रखने पर संदेह पैदा हो गया है।
डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट का एक्शन
वित्तीय चिंताओं के अलावा, Adhbhut Infrastructure डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (Directorate of Enforcement) के एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (Provisional Attachment Order) से भी जूझ रही है। यह ऑर्डर 13 सितंबर, 2024 को जारी किया गया था और इसमें कंपनी की कुछ प्रॉपर्टीज और प्रमोटर्स के शेयर अटैच किए गए हैं। कंपनी ने इस ऑर्डर के खिलाफ अपील की है, जिसे एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी (Adjudicating Authority) ने कन्फर्म भी कर दिया है। हालांकि, यह अनिश्चितता अभी बनी हुई है। कंपनी का मैनेजमेंट दावा कर रहा है कि इस कानूनी मुद्दे का रोजमर्रा के बिजनेस ऑपरेशंस पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
आगे क्या?
ऑडिटर की 'गोइंग कंसर्न' वाली चेतावनी कंपनी की भविष्य की व्यवहार्यता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। निवेशक मैनेजमेंट की उन रणनीतियों पर नजर रखेंगे जिनसे संचित घाटे को कम किया जा सके और नेट वर्थ को बढ़ाया जा सके। डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट के अटैचमेंट ऑर्डर के खिलाफ अपील का नतीजा भी अहम होगा।
मुख्य जोखिम
मुख्य जोखिम नेट वर्थ का लगातार कम होना, और अधिक वित्तीय घाटे की संभावना, और अटैच की गई संपत्तियों का मामला अनसुलझा रहना है। ऑडिटर का 'गोइंग कंसर्न' वाला बयान सबसे बड़ा तात्कालिक जोखिम है, जो भविष्य में फंडिंग और संचालन की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
