RBI की पॉलिसी का मुख्य फैसला
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने सर्वसम्मति से प्रमुख नीतिगत दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है। रेपो रेट 5.25% पर अपरिवर्तित है, वहीं स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.0% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.5% पर बना हुआ है। RBI ने अपनी पॉलिसी को 'न्यूट्रल' यानी तटस्थ बनाए रखा है।
क्यों अहम है यह फैसला?
यह निर्णय RBI के वर्तमान आर्थिक आकलन को दर्शाता है, जिसमें विकास और महंगाई दोनों चिंताओं का संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। ब्याज दरों का स्थिर रहना आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे सकता है, लेकिन बदले हुए अनुमान भविष्य की संभावित चुनौतियों की ओर इशारा करते हैं।
बदले हुए आर्थिक अनुमान
RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान पहले के 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है। वहीं, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई दर का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है। अनुमानों में इस बदलाव का मुख्य कारण भू-राजनीतिक जोखिमों का बढ़ना और सप्लाई-साइड का दबाव है। RBI ने FY27 के लिए भारतीय कच्चे तेल की टोकरी की अनुमानित कीमत को भी बढ़ाकर $95 प्रति बैरल कर दिया है।
आगे क्या?
पॉलिसी के तटस्थ रुख का मतलब है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कोई कटौती या बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। अब RBI का मुख्य ध्यान महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को गति देने पर रहेगा। इसके अलावा, विदेशी पूंजी प्रवाह (Capital Inflows) को बढ़ाने और बाहरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई नए उपाय भी पेश किए गए हैं। इनमें Fully Accessible Route (FAR) के तहत G-sec के दायरे का विस्तार और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं।
किन जोखिमों पर रहेगी नजर?
RBI ने जिन प्रमुख जोखिमों की ओर इशारा किया है, उनमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, भू-राजनीतिक घटनाओं से सप्लाई चेन में बाधाएं, और सामान्य से कम मॉनसून और अल नीनो का ग्रामीण अर्थव्यवस्था व कृषि उत्पादन पर पड़ने वाला प्रभाव शामिल हैं।
निवेशक क्या देखें?
निवेशकों को अब मॉनसून की प्रगति, वैश्विक कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक घटनाओं और महंगाई व विकास दर के असल आंकड़ों पर नजर रखनी होगी, ताकि वे RBI के अनुमानों के साथ उनकी तुलना कर सकें।
