IRFC का रिकॉर्ड मुनाफा ₹7,000 करोड़ पार, रेलवे से हटकर इन सेक्टरों में भी करेगी कमाई!

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AuthorNeha Patil|Published at:
IRFC का रिकॉर्ड मुनाफा ₹7,000 करोड़ पार, रेलवे से हटकर इन सेक्टरों में भी करेगी कमाई!
Overview

इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) ने वित्त वर्ष 2026 में कमाई का नया रिकॉर्ड बनाया है! कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹7,000 करोड़ के पार चला गया है। अब IRFC अपनी कमाई का जरिया बढ़ाने के लिए रेलवे के अलावा दूसरे सेक्टर्स में भी फाइनेंसिंग करने की तैयारी में है।

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IRFC का शानदार प्रदर्शन: ₹7,000 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा!

इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IRFC) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने अब तक का सबसे अधिक प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है, जो ₹7,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। इसके साथ ही, कंपनी का नेट वर्थ (Net Worth) भी बढ़कर ₹56,000 करोड़ से ज्यादा हो गया है, जो पिछले साल ₹52,000 करोड़ से अधिक था।

लक्ष्य से कहीं आगे: एसेट सैंक्शन और डिस्बर्समेंट

IRFC ने अपने एसेट सैंक्शन (Asset Sanction) के लक्ष्यों को भी पीछे छोड़ दिया है। कंपनी ने ₹74,000 करोड़ का सैंक्शन हासिल किया, जबकि लक्ष्य ₹60,000 करोड़ का था। इसी तरह, डिस्बर्समेंट (Disbursement) ₹35,000 करोड़ तक पहुंच गया, जो अनुमानित ₹30,000 करोड़ से काफी ज्यादा है।

'IRFC 2.0': रेलवे से बाहर विस्तार की योजना

कंपनी सिर्फ रेलवे फाइनेंसिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती। IRFC अपनी 'IRFC 2.0' रणनीति के तहत अपने बिजनेस पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव लाने जा रही है। अगले 3-4 सालों में, कंपनी का लक्ष्य अपने कुल फाइनेंसिंग का 60% हिस्सा नॉन-रेलवे सेक्टर्स और 40% रेलवे फाइनेंसिंग में लगाना है।

फायदे और नए अवसर

IRFC अब अन्य पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) और सरकारी संस्थाओं को भी लोन देने का विस्तार कर रही है। इसमें रेलवे से जुड़े सेक्टर्स जैसे फर्टिलाइजर प्लांट्स भी शामिल हैं। IRFC की सबसे बड़ी ताकत है कि उसका जीरो नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रिकॉर्ड है, जिससे वह सस्ते में फंड जुटा पाती है।

ज्यादा मार्जिन का लक्ष्य

नई बिजनेस सेगमेंट में कंपनी को 100-120 बेसिस पॉइंट तक ज्यादा नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) मिलने की उम्मीद है, जबकि रेलवे फाइनेंसिंग से यह मार्जिन 35-40 बेसिस पॉइंट ही रहता है। IRFC का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 तक अपने एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) को ₹5 लाख करोड़ तक ले जाना है।

संभावित जोखिम और मजबूत स्थिति

हालांकि, नॉन-रेलवे एंटिटीज को फाइनेंस करने में जोखिम थोड़ा अलग हो सकता है। साथ ही, विदेशी मुद्रा से जुड़े कर्ज पर एक्सचेंज रेट का असर भी कंपनी के नतीजों पर पड़ सकता है। लेकिन IRFC का मजबूत बैलेंस शीट, जीरो NPA और कम लागत पर फंड जुटाने की क्षमता उसे दूसरों से आगे रखती है।

आगे क्या देखना होगा?

निवेशकों की नजर IRFC के 60-40 के बिजनेस मिक्स लक्ष्य पर रहेगी। साथ ही, AUM, रेवेन्यू और PAT में लगातार ग्रोथ देखना भी अहम होगा। नॉन-रेलवे पोर्टफोलियो के प्रदर्शन और जोखिम का आकलन भी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.