गुजरात हाई कोर्ट ने Zodiac Energy के लिए एक पुराने टैक्स विवाद में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फाइनेंशियल ईयर 2018-19 से जुड़े GST डिमांड और शो-कॉज नोटिस को खारिज कर दिया है, जिससे कंपनी के सिर से एक पुरानी कानूनी अनिश्चितता खत्म हो गई है।
कानूनी विवाद का अंत
Zodiac Energy के निवेशकों के लिए यह खबर राहत भरी है। मामला फाइनेंशियल ईयर 2018-19 के दौरान हुए सोलर कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़ा था, जिस पर टैक्स अधिकारियों ने सवाल उठाए थे। हाई कोर्ट ने 29 सितंबर, 2026 को अपने फैसले में साफ किया कि कंपनी के मामले में GST एक्ट की सेक्शन 74 लागू नहीं होती है। इसके तहत 30 जून, 2025 को जारी शो-कॉज नोटिस और 24 दिसंबर, 2025 को आए डिमांड ऑर्डर को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।
क्या था पूरा विवाद?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब कंपनी के सोलर पावर प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले गुड्स और सर्विसेज के वैल्यूएशन 70:30 के अनुपात को लेकर टैक्स विभाग ने अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और जुर्माने की मांग की थी। यह उस दौर का मसला था जब GST का नियम नया था और सेक्टर में 'कंपोजिट कॉन्ट्रैक्ट्स' का टैक्स ट्रीटमेंट एक बड़ा विवाद बना हुआ था।
कंपनी और निवेशकों पर असर
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का उसके मौजूदा फाइनेंशियल या ऑपरेशनल कामकाज पर कोई मटेरियल असर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब है कि यह फैसला कंपनी की बैलेंस शीट में कोई बड़ा बदलाव नहीं लाएगा, बल्कि यह केवल एक पुरानी कानूनी बाधा (Legacy Legal Uncertainty) को हटाने जैसा है।
अब आगे क्या?
कानूनी झमेले से मुक्त होने के बाद, अब निवेशकों का पूरा ध्यान कंपनी के कोर बिजनेस यानी सोलर EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) के कामकाज और उसके ऑर्डर बुक की ग्रोथ पर होना चाहिए। कंपनी अब अपना पूरा फोकस प्रोजेक्ट डिलीवरी और इंडस्ट्री की बढ़ती डिमांड को पूरा करने पर लगा सकती है।
