Western Overseas Study Abroad के लिए फाइनेंशियल ईयर **26** काफी शानदार रहा। कंपनी ने रेवेन्यू में मामूली गिरावट के बावजूद **₹2.73 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले **23.4%** अधिक है।
मुनाफे की रफ्तार और मार्जिन का खेल
कंपनी ने अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर करते हुए शानदार नतीजे पेश किए हैं। हालांकि कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल के ₹22.73 करोड़ से घटकर ₹20.27 करोड़ रह गया, लेकिन कंपनी का प्रॉफिट ₹2.73 करोड़ पर पहुंच गया है। सबसे बड़ी कामयाबी EBITDA मार्जिन का 515 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 22.4% पर पहुंचना है।
नई रणनीति का असर
कंपनी ने अब पारंपरिक प्लेसमेंट फीस पर निर्भरता कम कर दी है। अब कंपनी ने 'नॉन-कमीशन' रेवेन्यू स्ट्रीम्स जैसे एग्जाम बुकिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अब कुल आय का 41% हिस्सा बन चुके हैं।
टेक्नोलॉजी और भविष्य की राह
IPO से मिले फंड का इस्तेमाल कंपनी भविष्य की ग्रोथ के लिए कर रही है। इसमें ₹3 करोड़ का निवेश टेक्नोलॉजी (ERP और मोबाइल ऐप) में और ₹3.43 करोड़ का बजट मार्केटिंग कैंपेन के लिए रखा गया है। साथ ही, कंपनी अब अपना ध्यान कनाडा के अलावा यूके, जर्मनी, फ्रांस और आयरलैंड जैसे बाजारों पर बढ़ा रही है।
रिस्क और फाइनेंशियल हेल्थ
कंपनी फिलहाल कर्ज-मुक्त (Debt-free) है और ₹2.89 करोड़ की कैश पोजीशन के साथ मजबूत स्थिति में है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय वीजा नियमों में बदलाव और 'परमिट क्रंच' के कारण कंपनी सतर्क बनी हुई है। स्ट्रिक्ट कॉस्ट मैनेजमेंट के चलते कर्मचारियों का खर्च भी ₹7.75 करोड़ से घटकर ₹5.78 करोड़ पर आ गया है।
