Vishvprabha Ventures ने 30 सितंबर, 2026 को अपनी 42वीं AGM बुलाई है। इस मीटिंग में **₹4 करोड़** के प्रमोटर लोन को इक्विटी में बदलने पर चर्चा होगी, लेकिन कंपनी का घाटा और ऑडिट में निकली खामियां निवेशकों के लिए बड़ी चिंता का विषय हैं।
क्या है बड़ा अपडेट?
Vishvprabha Ventures ने अपनी 42वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) का ऐलान कर दिया है, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। कंपनी का मुख्य एजेंडा ₹4 करोड़ तक के असुरक्षित प्रमोटर लोन को इक्विटी या कनवर्टिबल इंस्ट्रूमेंट्स में बदलना है। इसके अलावा, कंपनी मिस्टर परेश रमनलाल देसाई को अगले 5 साल के लिए एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर फिर से नियुक्त करने पर शेयरहोल्डर्स की मुहर चाहती है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह चिंताजनक?
कंपनी का फाइनेंशियल ईयर 2025-26 का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। कंपनी ने ₹64.32 लाख का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया है। ऑडिट फर्म M/s Nimesh Mehta & Associates ने अपनी रिपोर्ट में कड़ी आपत्तियां जताई हैं, जिसमें स्टाफ खर्चों की पुष्टि न होना, इन्वेंट्री ट्रैकिंग का मैनुअल होना, और GST व MSME बकाया से जुड़ी टैक्स अनुपालन में चूक शामिल है।
रिस्क फैक्टर और विवाद
निवेशकों को इन गंभीर ऑडिट क्वालिफिकेशन्स पर नजर रखनी चाहिए, खासकर ग्रेच्युटी देनदारियों को न पहचानने और ₹10.26 करोड़ की TDR सेल्स का खुलासा न करने जैसे मुद्दे। कंपनी पहले ही BSE में देरी से फाइलिंग और क्वालिफाइड कंपनी सेक्रेटरी की कमी के कारण जुर्माना भर चुकी है।
कंपनी के आंकड़े
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹831.26 लाख रहा, जो पिछले साल ₹761.95 लाख था। हालांकि, कंसोलिडेटेड स्तर पर कंपनी को ₹137.34 लाख का नुकसान हुआ है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा सिर्फ ₹2.28 लाख था। अब देखना होगा कि 30 सितंबर की मीटिंग में शेयरहोल्डर्स इन प्रमोटर फैसलों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
