Virtual Global Education ने वारंट जारी करके **₹42 करोड़** जुटाने का ऐलान किया है। हालांकि, कंपनी ने Q2 में केवल **₹2.95 लाख** का मामूली मुनाफा दर्ज किया है, जबकि ऑडिटर ने **₹33 करोड़** के लोन और एडवांस पर दस्तावेजों की कमी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मुनाफे और फंडरेजिंग का गणित
सितंबर 2026 को समाप्त हुई तिमाही में कंपनी ने ₹2.95 लाख का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹15.65 लाख के नुकसान के मुकाबले एक सुधार है। इस बीच, कंपनी के बोर्ड ने ₹1 प्रति वारंट की दर से 42 करोड़ फुली कन्वर्टिबल वारंट जारी करने को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, कंपनी ने CFO गौरव गर्ग के इस्तीफे और कृष्ण बंसल की नियुक्ति के साथ अपनी सहायक कंपनी 'शिक्षण स्कूल प्राइवेट लिमिटेड' को बेचने की भी योजना बनाई है।
गवर्नेंस पर उठे बड़े सवाल
फंड जुटाने की यह कवायद ऑडिटर 'आशा एंड एसोसिएट्स' की एक 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) की वजह से सुर्खियों में है। ऑडिटर्स ने लैंड एडवांस के ₹5.32 करोड़, लोन और एडवांस के ₹21.44 करोड़, और ट्रेनिंग खर्चों के ₹6.37 करोड़ के लिए जरूरी दस्तावेजों की अनुपलब्धता पर सवाल उठाए हैं।
पिछला रिकॉर्ड और रिस्क
समस्या यहीं खत्म नहीं होती। 2025 के एक स्पेशल ऑडिट में ₹88.18 लाख के फंड के हेरफेर (Misappropriation) का मामला सामने आया था, जो अभी तक अनसुलझा है। यही नहीं, पिछले वारंट इश्यू से जुटाए गए ₹10.69 करोड़ के उपयोग पर भी ऑडिटर ने स्पष्टता न होने की बात कही है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों को अब कंपनी की ओर से आने वाले पोस्टल बैलट प्रोसेस पर नजर रखनी चाहिए। स्टॉक की स्थिरता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि मैनेजमेंट इन ₹33 करोड़ के अनवेरिफाइड खर्चों और ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों को कैसे स्पष्ट करता है।
