इन्सॉल्वेंसी की कार्यवाही से जूझ रही Vas Infrastructure Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए **₹32.51 लाख** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जबकि पिछले साल कंपनी को **₹50.46 लाख** का नुकसान हुआ था।
मुनाफे का सच और कानूनी अड़चनें
जहां एक ओर कंपनी ने सालाना नतीजों में मुनाफे की रिपोर्ट दी है, वहीं दूसरी ओर इसके ऑपरेशन्स ठप पड़े हैं। वर्तमान में कंपनी का पूरा मैनेजमेंट 'रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल' (RP) अशोक कुमार गोलेछा के हाथों में है। NCLT, मुंबई की देखरेख में चल रही दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) के तहत कंपनी के भविष्य पर संशय बरकरार है।
क्यों चुनौतीपूर्ण है कंपनी की स्थिति?
हाल ही में NCLT ने Authum Investment and Infrastructure Limited द्वारा पेश किए गए पुराने रेज़ोल्यूशन प्लान को खारिज कर दिया था। इसके बाद कोर्ट ने 120 दिन के भीतर प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का आदेश दिया है। कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ₹261.09 करोड़ के उन संदिग्ध लेनदेन की है, जिन्हें लेकर रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल ने फ्रॉड का आवेदन दाखिल किया है। मामला अभी NCLT में पेंडिंग है।
ऑडिटर्स की चेतावनी
कंपनी के ऑडिटर्स ने भी कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' (कारोबार जारी रखने) स्टेटस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि दिवालिया प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की कमी के कारण वित्तीय बयानों की पुष्टि करना कठिन है। मार्च 2026 तक कंपनी का कुल संचित घाटा (Accumulated Loss) बढ़कर ₹30,131.76 लाख तक पहुंच गया है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल कंपनी के पास नया वर्किंग कैपिटल या कर्ज नहीं है। निवेशकों की नजर अब 25 सितंबर 2026 को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) पर है, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की जाएगी।
