लिक्विडेशन (Liquidation) की प्रक्रिया से गुजर रही Ushdev International ने अपनी वित्तीय हालत का खुलासा किया है। कंपनी की नेट वर्थ **₹12,269 करोड़** नेगेटिव हो गई है, जबकि सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) की जांच भी जारी है।
भारी कर्ज का बोझ और लिक्विडेशन
कंपनी की मौजूदा वित्तीय स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी की कुल लायबिलिटीज (Liabilities) ₹12,489.70 करोड़ तक पहुंच चुकी हैं। NCLT, मुंबई ने 16 अक्टूबर 2025 को ही कंपनी के लिक्विडेशन का आदेश दे दिया था, क्योंकि 'Taguda Pte. Ltd.' कंपनी के रिजॉल्यूशन प्लान को लागू करने में विफल रही थी। इस बीच, State Bank of India के नेतृत्व में लेंडर्स ने ₹18.13 करोड़ की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जब्त कर ली है।
ऑडिटर्स ने खड़ा किया हाथ
स्टैच्युटरी ऑडिटर 'SGN & CO' ने अपनी रिपोर्ट में 'Disclaimer of Opinion' जारी किया है। इसका मतलब है कि कंपनी के पास अपने दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं और इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल भी पूरी तरह फेल हो चुके हैं।
शेयरधारकों के लिए खतरा
IBC के सेक्शन 53 के तहत, लिक्विडेशन के दौरान शेयरधारकों का नंबर सबसे आखिरी में आता है। कंपनी की देनदारियां उसकी संपत्तियों से कहीं ज्यादा हैं, जिसके कारण निवेशकों के लिए रिकवरी की उम्मीद ना के बराबर है। कंपनी के मैनेजमेंट के अधिकार निलंबित हैं और लिक्विडेटर 'Trupalkumar Patel' पूरे मामले को देख रहे हैं। गौरतलब है कि कंपनी के सर्वर जब्त होने के कारण 2017-18 के बाद से कई जरूरी एकाउंटिंग रिकॉर्ड्स अब भी सीबीआई के पास हैं।
