U.P. Hotels Limited का BSE से अपनी मर्जी से बाहर निकलने (Voluntary Delisting) का सपना फिलहाल पूरा नहीं हो सका है। शेयरधारकों की वोटिंग में कंपनी जरूरी **75%** का आंकड़ा नहीं जुटा पाई और प्रस्ताव महज **74.55%** वोटों के साथ अटक गया।
आंकड़ों का गणित
इस महत्वपूर्ण वोटिंग में कुल 1,324,643 शेयरधारकों ने प्रस्ताव के पक्ष में अपना वोट दिया, जो कि कुल वैध वोटों का 74.55% था। वहीं, 452,206 शेयरों के साथ प्रस्ताव का विरोध किया गया, जिससे यह विशेष रेजोल्यूशन (Special Resolution) पास होने से चूक गया।
क्यों फेल हुआ प्रस्ताव?
कंपनी ने SEBI के पास डिलिस्टिंग आवेदन की समय सीमा बढ़ाने के लिए शेयरधारकों से मंजूरी मांगी थी। कंपनीज एक्ट के नियमों के अनुसार, ऐसे प्रस्तावों को पास कराने के लिए कम से कम 75% बहुमत की जरूरत होती है। U.P. Hotels महज 0.45% के अंतर से इस लक्ष्य को हासिल करने से चूक गई, जिसके बाद अब पूरी डिलिस्टिंग प्रक्रिया अधर में लटक गई है।
निवेशकों के लिए क्या है स्थिति?
यह डिलिस्टिंग प्लान अब फिलहाल रुक गया है, जिसका मतलब है कि कंपनी के शेयर BSE पर लिस्टेड रहेंगे। जो छोटे निवेशक डिलिस्टिंग के जरिए बाहर निकलने की उम्मीद लगाए बैठे थे, उनके लिए अब आगे की राह अनिश्चित हो गई है।
आगे क्या होगा?
वोटिंग प्रक्रिया की निगरानी Deepak Bansal & Associates ने की थी, जिसमें कुल 1,776,849 वोट डाले गए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कंपनी का मैनेजमेंट क्या कदम उठाता है। क्या वे भविष्य की जनरल मीटिंग में फिर से कोई संशोधित प्रस्ताव लाएंगे या पूरी तरह से इस इरादे को छोड़ देंगे, यह आने वाली रेगुलेटरी फाइलिंग्स से साफ होगा।
