Thacker & Company: शेयर बाय-बैक का रास्ता साफ, नए ऑडिटर की नियुक्ति पर लगी मुहर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Thacker & Company: शेयर बाय-बैक का रास्ता साफ, नए ऑडिटर की नियुक्ति पर लगी मुहर

Thacker & Company Ltd के शेयरधारकों ने कंपनी के नए प्रस्तावों पर अपनी सहमति दे दी है। कंपनी अब भविष्य में शेयर बाय-बैक (Share Buy-back) के लिए कानूनी रूप से तैयार है और साथ ही नए स्टेट्यूटरी ऑडिटर्स की नियुक्ति भी कर दी गई है।

बड़े फैसले और वोटिंग का गणित

Thacker & Company Ltd ने हाल ही में संपन्न हुई अपनी पोस्टल बैलट प्रक्रिया के नतीजों का ऐलान कर दिया है। कंपनी के सामने रखे गए सभी 4 प्रस्तावों को शेयरधारकों ने भारी बहुमत के साथ पास कर दिया है। वोटिंग का समर्थन प्रतिशत 87.40% से 98.66% के बीच रहा है, जो मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

बाय-बैक की तैयारी और ऑडिटर्स में बदलाव

सबसे अहम फैसला कंपनी के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' में संशोधन का है, जिसके जरिए अब Article 63A को शामिल किया गया है। यह संशोधन भविष्य में कंपनी को शेयर बाय-बैक करने का कानूनी आधार देता है। हालांकि अभी कोई बाय-बैक घोषित नहीं हुआ है, लेकिन यह बोर्ड के पास शेयरहोल्डर वैल्यू बढ़ाने का एक नया विकल्प तैयार करता है। इसके अलावा, कंपनी ने M/s. V K Beswal & Associates को नया स्टेट्यूटरी ऑडिटर नियुक्त किया है।

इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट और रिस्क फैक्टर

कंपनी ने Biodegradable Products India Ltd (BPIL) के साथ ₹20 करोड़ तक के इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट (ICD) एग्रीमेंट को रिन्यू किया है। यह व्यवस्था फाइनेंशियल ईयर 2030-31 तक जारी रहेगी और इसे अचल संपत्ति (Immovable Property) के गिरवी रहने से सुरक्षित किया गया है।

निवेशकों के लिए ध्यान देने वाली बात यह है कि इस ज्वाइंट मॉर्गेज की कुल लिमिट ₹200 करोड़ तक है। हालांकि यह एक सुरक्षित ट्रांजैक्शन है, लेकिन रिपोटेड पार्टी ट्रांजैक्शन (RPT) होने के नाते, इसकी वित्तीय सेहत पर निवेशकों को पैनी नजर रखनी चाहिए ताकि पूंजी सुरक्षित रहे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.