सुप्रीम कोर्ट ने Tata Steel के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी पर लगी ₹1,781 करोड़ की टैक्स और पेनल्टी की डिमांड को खारिज कर दिया है। ITC विवाद से जुड़ी इस राहत से कंपनी की बड़ी फाइनेंशियल देनदारी खत्म हो गई है।
कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
25 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने Tata Steel के हक में अपना फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने कंपनी की अपील को स्वीकार करते हुए ₹890.52 करोड़ की टैक्स डिमांड और उतनी ही रकम की पेनल्टी को रद कर दिया है। कोर्ट ने इस पर लगने वाले ब्याज को भी खत्म कर दिया है, जिससे दिसंबर 2025 का पिछला आदेश अब पूरी तरह अमान्य हो गया है।
क्यों है यह बड़ी राहत?
यह मामला फाइनेंशियल ईयर 2018-19 से 2020-21 के बीच लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ा था। जमशेदपुर CGST कमिश्नर के नोटिस के बाद से ही यह एक बड़ी फाइनेंशियल लायबिलिटी के तौर पर कंपनी की बैलेंस शीट पर दबाव बना रहा था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने कंपनी को उस तत्काल वित्तीय बोझ से मुक्त कर दिया है।
आगे क्या है रास्ता?
हालांकि राहत बड़ी है, लेकिन विभाग के पास अभी भी एक मौका बाकी है। कोर्ट ने टैक्स विभाग को CGST एक्ट की धारा 74 के तहत नई कार्यवाही शुरू करने की छूट दी है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि विभाग को अपनी नई प्रक्रिया 28 फरवरी 2027 से पहले पूरी करनी होगी।
निवेशकों के लिए संकेत
फिलहाल के लिए, ₹1,781 करोड़ की देनदारी का फौरी संकट टल गया है। निवेशकों को अब केवल यह देखना होगा कि क्या फरवरी 2027 तक CGST अथॉरिटीज इस फाइल को दोबारा खोलती हैं या नहीं। फिलहाल कंपनी की कंटिजेंट लायबिलिटी प्रोफाइल में बड़ा सुधार देखने को मिला है।
