Tarini International की FY26 एनुअल रिपोर्ट में ऑडिटर ने क्वालिफाइड ओपिनियन (Qualified Opinion) दिया है। कंपनी पर 'गोइंग कंसर्न' (Going-concern) का खतरा मंडरा रहा है और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई समेत कई कानूनी चुनौतियां निवेशकों की चिंता बढ़ा रही हैं।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस का सच
कंपनी ने अपने FY26 के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसमें स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹250.34 लाख और नेट प्रॉफिट ₹49.71 लाख दर्ज किया गया है। लेकिन असल चिंता ऑडिटर्स की रिपोर्ट है। M/s M. Modi & Associates ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में 'Qualified Opinion' दिया है। ऑडिटर्स का कहना है कि लॉस मेकिंग सब्सिडियरी कंपनियों में ₹1.22 करोड़ का निवेश कंपनी के भविष्य के लिए बड़ा जोखिम है। अगर इन घाटे को सही ढंग से एडजस्ट किया जाए, तो कंपनी का प्रॉफिट ₹78.40 लाख के बजाय ₹43.20 लाख के नुकसान में बदल जाएगा।
इंटरनल कंट्रोल में खामियां
ऑडिटर्स ने कंपनी के इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल में भारी कमियां पाई हैं। लंबी अवधि के निवेश के इंपेयरमेंट और क्रेडिटर्स के बैलेंस रिकॉन्सिलिएशन में गड़बड़ियों ने गवर्नेंस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए यह एक बड़ा रेड फ्लैग है।
AGM और कॉर्पोरेट फैसलों पर नजर
कंपनी अपनी 27वीं AGM 30 सितंबर, 2026 को आयोजित करेगी। मैनेजमेंट 10 ग्रुप एंटिटीज के साथ ₹60 करोड़ तक के ट्रांजेक्शंस के लिए मंजूरी मांग रहा है। साथ ही, वाकामुल्ला चंद्रशेखर को फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने पर वोटिंग होगी, जो बिना किसी मेहनताने के काम करेंगे, जबकि वी. अनु नायडू को ₹1.60 लाख प्रति माह की सैलरी पर होल-टाइम डायरेक्टर बनाने का प्रस्ताव है।
कानूनी पचड़ों में फंसी कंपनी
कंपनी के लिए कानूनी मोर्चे पर भी राहत नहीं है। साल 2017 से प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अटैच किया गया एक फार्महाउस मामला अभी भी दिल्ली हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसके अलावा, सिक्योरिटीज अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील पेंडिंग है। भले ही कंपनी ने ROC के 9 मामलों में जीत हासिल की हो, लेकिन इन हेडविंड्स का असर निवेशकों के सेंटीमेंट पर साफ दिख रहा है।
