TTL Enterprises के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 की शुरुआत मुश्किलों भरी रही है। कंपनी का मुनाफा काफी गिर गया है और साथ ही ऑडिटर ने टैक्स देनदारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर दबाव\n\nकंपनी के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, नेट प्रॉफिट गिरकर महज ₹5.96 लाख पर आ गया है, जबकि कंपनी का कुल रेवेन्यू ₹26.19 करोड़ के स्तर पर सिमट गया है। अर्निंग्स पर दबाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कंपनी का EPS यानी अर्निंग पर शेयर ₹33.49 से घटकर ₹8.57 रह गया है।\n\n### ऑडिट और गवर्नेंस की चुनौतियां\n\nनिवेशकों के लिए सबसे चिंताजनक बात ऑडिटर्स की टिप्पणी है। कंपनी के नए ऑडिटर M/s S K Bhavsar & Co. के सामने पुरानी विरासत की कई मुश्किलें हैं। इसमें ₹15.45 लाख का ऐसा GST इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम शामिल है जिसे ऑडिटर ने अयोग्य माना है, साथ ही ₹4.70 लाख की इनकम टैक्स देनदारी भी लंबित है। इन अनसुलझे टैक्स मामलों के चलते रेगुलेटरी रिस्क बना हुआ है।\n\n### बोर्ड में बड़ा बदलाव और रीस्ट्रक्चरिंग\n\nकंपनी में मैनेजमेंट के स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ओपन ऑफर के बाद राजगोर परिवार के सदस्यों ने मैनेजिंग डायरेक्टर और CFO के पद से इस्तीफा दे दिया है। अब कंपनी की कमान लालाराम के साथ-साथ नए डायरेक्टर्स शोभा और वीरेंद्र ठाकोर संभाल रहे हैं। इसके अलावा, Ardent Ventures LLP ने BSE के पास खुद को 'प्रमोटर ग्रुप' से 'पब्लिक' कैटेगरी में रीक्लासिफाई करने की अर्जी दी है, जिस पर अभी अंतिम फैसले का इंतजार है।