Super Crop Safe: रेवेन्यू में **17%** की बढ़ोतरी, लेकिन कंपनी पर मंडरा रहा 'दिवालिया' होने का खतरा!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Super Crop Safe: रेवेन्यू में **17%** की बढ़ोतरी, लेकिन कंपनी पर मंडरा रहा 'दिवालिया' होने का खतरा!

Super Crop Safe ने फाइनेंशियल ईयर **2026** के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **17.05%** बढ़कर **₹53.13 करोड़** रहा, लेकिन नेट प्रॉफिट **7.47%** गिरकर **₹2 करोड़** पर आ गया है। सबसे बड़ी चिंता ऑडिटर की उस चेतावनी पर है जिसमें कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) स्टेटस पर सवाल उठाए गए हैं।

फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का हाल

वित्तीय वर्ष 2026 में कंपनी की कमाई तो बढ़ी, लेकिन मुनाफे की रफ्तार थम गई। EBITDA में 9.53% की गिरावट आई और यह ₹3.96 करोड़ रह गया। बढ़ते खर्चों और रेगुलेटरी दबाव के चलते बॉटम लाइन पर बुरा असर पड़ा है।

ऑडिटर की सख्त चेतावनी

कंपनी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत स्टेट्यूटरी ऑडिटर की रिपोर्ट है। ऑडिटर ने कंपनी की साख और भविष्य पर संदेह जताया है। इसका मुख्य कारण ₹4.12 करोड़ का बकाया सरकारी ड्यूज (Statutory Dues) है, जो पिछले साल ₹3.60 करोड़ था। साथ ही, कंपनी पर RBI और Companies Act, 2013 के नियमों के उल्लंघन का भी आरोप है।

गवर्नेंस और कंप्लायंस में चूक

सेक्रेटेरियल ऑडिट में कंपनी की पोल खुल गई है:

  • SEBI के नियमों के बावजूद कंपनी की अपनी वेबसाइट ही फंक्शनल नहीं है।
  • BSE द्वारा नियमों के पालन में चूक के लिए कंपनी पर जुर्माना लगाया जा चुका है।
  • IEPF और ROC फाइलिंग में भी भारी कोताही बरती गई है।

निवेशकों के लिए जोखिम (Risks to watch)

कंपनी के पास लिक्विडिटी का भारी संकट है, जिसके चलते सैलरी देने में भी देरी हो रही है। GST, प्रोविडेंट फंड और इनकम टैक्स जैसे मदों में ₹4.12 करोड़ का बकाया होना कंपनी की ऑपरेशनल स्टेबिलिटी के लिए खतरा है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए कंपनी ने निवेशकों को कोई डिविडेंड नहीं देने का फैसला किया है। अब देखना यह होगा कि क्या मैनेजमेंट इन कानूनी और फाइनेंशियल उलझनों से कंपनी को बाहर निकाल पाता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.