Sterling Green Woods Ltd की 34वीं AGM में कंपनी की पोल खुल गई है। ऑडिट में रेगुलेटरी फाइलिंग में देरी, कमेटी गठन में चूक और सहायक कंपनी को दिए गए अनाधिकृत लोन जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं।
गवर्नेंस में बड़ी चूक
30 सितंबर, 2026 को आयोजित 34वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में भले ही फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को मंजूरी दे दी गई हो, लेकिन ऑडिट रिपोर्ट्स ने कंपनी के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनी में स्टैच्युटरी और सेक्रेटेरियल ऑडिट के दौरान कई नियमों की अनदेखी पकड़ी गई है।
क्यों चिंता में हैं निवेशक?
ऑडिट में जो मुख्य कमियां पाई गई हैं, वे इस प्रकार हैं:
- सॉफ्टवेयर की कमी: अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में 'ऑडिट ट्रेल' (Audit Trail) का न होना।
- रेगुलेटरी देरी: जरूरी फाइलिंग में देरी और बोर्ड कमेटी के गठन में नियमों का उल्लंघन।
- अनाधिकृत लेन-देन: कंपनी ने अपनी सब्सिडियरी को ₹1.28 लाख का लोन बिना शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के दे दिया, जो सीधे तौर पर कंपनी एक्ट की धारा 185 का उल्लंघन हो सकता है।
मैनेजमेंट का रुख और आगे क्या?
कंपनी मैनेजमेंट ने इन सभी गड़बड़ियों को 'अनजाने में हुई गलती' (Inadvertence) बताया है। मैनेजमेंट ने वादा किया है कि वे जल्द ही नया सॉफ्टवेयर लागू करेंगे और इंटरनल कंट्रोल को मजबूत करेंगे। साथ ही, कंपनी अपने कुछ रिजॉर्ट प्रॉपर्टीज के एसेट इम्पेयरमेंट का भी मूल्यांकन करवा रही है।
निवेशकों के लिए सलाह है कि वे कंपनी द्वारा इन कमियों को दूर करने की प्रक्रिया और संबंधित पक्षों (Related-party transactions) के साथ लेन-देन पर बारीकी से नजर रखें।
