Skipper Limited ने अपने प्रिफरेंशियल इश्यू के जरिए जुटाए गए **₹433.50 करोड़** की पूरी राशि का उपयोग कर लिया है। मॉनिटरिंग एजेंसी ने साफ कर दिया है कि फंड का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और कॉर्पोरेट कामों के लिए हुआ है और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है।
फंड का सही उपयोग और पारदर्शिता
Skipper Limited ने सितंबर तिमाही के लिए अपनी मॉनिटरिंग एजेंसी रिपोर्ट जमा की है, जिसमें यह पुष्टि हुई है कि कंपनी ने प्रिफरेंशियल इश्यू से मिले पूरे ₹433.50 करोड़ को तय लक्ष्यों के अनुसार खर्च कर लिया है। India Ratings & Research द्वारा जारी इस रिपोर्ट से निवेशकों का कंपनी के गवर्नेंस और फंड मैनेजमेंट पर भरोसा बढ़ा है।
पैसा कहां खर्च हुआ?
कंपनी ने इस पूरी राशि को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा है:
- कर्ज चुकाने में: कंपनी ने ₹327.50 करोड़ का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल डिमांड लोन और कैश क्रेडिट फैसिलिटी को सेटल करने में किया है।
- कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए: बाकी के ₹106 करोड़ का इस्तेमाल ऑपरेशनल जरूरतों के लिए किया गया, जिसमें कर्मचारियों की सैलरी के लिए ₹86.14 करोड़, एलसी (LC) पेमेंट के लिए ₹10.02 करोड़ और वैधानिक बकाए के लिए ₹9.84 करोड़ शामिल हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
कंपनी ने फंड के इस्तेमाल में 0% विचलन (Deviation) दर्ज किया है। 29 अक्टूबर, 2026 की स्टैच्यूटरी ऑडिटर सर्टिफिकेट के आधार पर यह पुष्टि हुई है कि पैसा बिल्कुल उसी काम में लगा, जिसके लिए निवेशकों से वादा किया गया था। कंपनी ने अपने कर्ज में कटौती का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि कंपनी अपनी वर्किंग कैपिटल जरूरतों को आगे कैसे मैनेज करती है और अगली तिमाही के नतीजों में कर्ज का क्या स्तर रहता है।
