Simplex Papers ने सितंबर तिमाही के लिए **₹0.19 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, लेकिन यह कमाई बिजनेस से नहीं बल्कि जमीन की बिक्री से आई है। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू जीरो है, जिसके चलते ऑडिटर्स ने कंपनी के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है असली खेल?
Simplex Papers के हालिया नतीजों में ₹0.19 करोड़ का जो नेट प्रॉफिट दिख रहा है, वह असल में कंपनी के बिजनेस की सफलता नहीं है। यह पूरा मुनाफा ₹0.23 करोड़ की फ्रीहोल्ड जमीन बेचने से आया है। हकीकत यह है कि कंपनी के कोर बिजनेस से रेवेन्यू पूरी तरह 'जीरो' है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹0.03 करोड़ का घाटा हुआ था, जिससे यह मुनाफे का आंकड़ा थोड़ा बेहतर लग सकता है, लेकिन बिजनेस की सेहत जस की तस बनी हुई है।
ऑडिटर्स की कड़ी चेतावनी (Auditor's Report)
स्टैच्युटरी ऑडिटर Khandelwal & Mehta LLP ने कंपनी की फाइनेंशियल कंडीशन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। ऑडिटर्स ने 'Emphasis of Matter' के जरिए साफ कहा है कि कंपनी का नेटवर्थ पूरी तरह खत्म हो चुका है। उनके मुताबिक, कंपनी के कामकाज में स्थिरता की भारी कमी है, जिससे यह अनिश्चितता पैदा हो गई है कि क्या कंपनी आने वाले समय में अपना कामकाज जारी रख पाएगी (Going Concern Concept)।
बैलेंस शीट पर दबाव
कंपनी की बैलेंस शीट बेहद डरावनी तस्वीर दिखाती है:
- टोटल इक्विटी: नेगेटिव ₹12.01 करोड़।
- कुल कर्ज: ₹12.44 करोड़।
- कुल एसेट्स: सिर्फ ₹1.60 करोड़।
यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का कैपिटल इरोजन (Capital Erosion) किस हद तक हो चुका है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि कंपनी की रेगुलेटरी फाइलिंग्स पर नजर रखें, क्योंकि ऑपरेशनल रिवाइवल के बिना कंपनी का कर्ज चुकाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
