इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही Simbhaoli Sugars ने जून तिमाही के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी को **₹25.34 करोड़** का शुद्ध घाटा हुआ है, और ऑडिटर ने कंपनी के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
आर्थिक सेहत पर गहरा असर
जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए जारी नतीजों के मुताबिक, Simbhaoli Sugars का नेट लॉस ₹2,534.53 लाख रहा, जबकि ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹14,611.07 लाख दर्ज किया गया। प्रति शेयर आय (EPS) (4.61) रही है। वर्तमान में कंपनी का कामकाज Interim Resolution Professional (IRP) अनुराग गोयल संभाल रहे हैं, क्योंकि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स सस्पेंडेड है।
ऑडिटर की सख्त चेतावनी
कंपनी के ऑडिटर्स 'B.K. Kapur and Co.' ने इन नतीजों पर 'Adverse Conclusion' जारी किया है। उनका कहना है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति बेहद खराब है और भारी कर्ज के डिफॉल्ट के चलते इसके 'गोइंग कंसर्न' बने रहने पर बड़ा संकट है। कंपनी ने अपने कर्ज पर ब्याज का प्रावधान भी नहीं किया है, जिससे हालात और पेचीदा हो गए हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कंपनी पर टैक्स डिमांड और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले भी पेंडिंग हैं। ऑडिटर्स ने बोर्ड सस्पेंशन के कारण डेटा वेरिफिकेशन में भी बाधा की बात कही है। कंपनी की सहायक इकाइयां, 'Integrated Casetech Consultants' और 'Simbhaoli Power', भी भारी वित्तीय दबाव में हैं।
मैनेजमेंट में बदलाव
इन सबके बीच, कंपनी ने योगेंद्र पाल आर्य को 'कॉर्पोरेट हेड – HR' नियुक्त किया है, लेकिन इन नियुक्तियों का असर कंपनी के सीमित ऑपरेशंस पर फिलहाल सीमित ही रहेगा। अब सबकी नजरें NCLT द्वारा मंजूर होने वाली रेजोल्यूशन प्लान पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि कंपनी का भविष्य क्या होगा।
