Siemens Energy India के सामने एक बड़ी कानूनी चुनौती खड़ी हो गई है। रूस की सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की अपील खारिज कर दी है, जिसके बाद अब कंपनी को **₹44.38 करोड़** का भुगतान करना पड़ सकता है।
रूसी कोर्ट का फैसला और वित्तीय बोझ
रूस की सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 के एक आर्बिट्रेशन (Arbitration) ऑर्डर के खिलाफ Siemens Energy India की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद कंपनी पर ₹44.38 करोड़ (लगभग USD 5.16 मिलियन) की लायबिलिटी बन गई है। इतना ही नहीं, कंपनी को 30 मई 2025 से भुगतान होने तक 8% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
कंपनी का रुख: 'फैसला गलत है'
Siemens Energy India ने साफ कर दिया है कि वह इस आदेश को कानूनी रूप से गलत मानती है। कंपनी का कहना है कि यह आर्बिट्रल ऑर्डर कानून और अनुबंध की शर्तों के हिसाब से सही नहीं है। फिलहाल मैनेजमेंट अपने कानूनी विकल्पों को तलाश रहा है ताकि कंपनी के हितों की रक्षा की जा सके।
आगे क्या होगा?
इस कानूनी अध्याय के रूस में बंद होने के बाद, अब खतरा यह है कि विपक्षी पक्ष इस फैसले को लागू करवाने के लिए भारतीय अदालतों का दरवाजा खटखटा सकता है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वे भारत में इस विदेशी अवॉर्ड को लागू करने की किसी भी कोशिश का मजबूती से विरोध करेंगे। निवेशकों को अब इस मामले में होने वाली अगली कानूनी कार्रवाई पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ के लिए एक बड़ी अनिश्चितता बनी हुई है।
