इन्सॉल्वेंसी (CIRP) की प्रक्रिया से गुजर रही SKIL Infrastructure ने जून तिमाही में **₹42.22 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, लेकिन यह कमाई बिजनेस से नहीं बल्कि वन-टाइम 'अदर इनकम' से आई है।
मुनाफे का सच क्या है?
इन्सॉल्वेंसी की प्रक्रिया से गुजर रही SKIL Infrastructure ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी ने ₹42.22 करोड़ का नेट प्रॉफिट दिखाया है। सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू यानी कोर बिजनेस से कमाई ₹0 है। यह मुनाफा पूरी तरह से कंपनी की सब्सिडियरी, Urban Infrastructure Holdings Pvt. Ltd. (UIHPL) में कैपिटल रिडक्शन के चलते 'अदर इनकम' के तौर पर आया है।
ऑडिटर की कड़ी चेतावनी
ऑडिटर AMS & Co LLP ने इन नतीजों पर सवाल उठाए हैं और अपनी रिपोर्ट में कई चिंताजनक बातें कही हैं:
- गोइंग कंसर्न रिस्क: कंपनी भविष्य में अपना कारोबार जारी रख पाएगी या नहीं, इस पर बड़ा संदेह है।
- अकाउंटिंग में गड़बड़ी: रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) द्वारा स्वीकार किए गए दावों और कंपनी की किताबों के बीच भारी अंतर है।
- डॉक्यूमेंटेशन की कमी: SKIL Shipyard Holdings के डीकंसोलिडेशन से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं और बैंक रिकॉर्ड्स तक ऑडिटर की पहुंच सीमित रही है।
- अनसुलझे बैलेंस: इंटरकंपनी लोन के आंकड़ों में अभी भी मिलान नहीं हो पाया है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल कंपनी के कामकाज की कमान रेजोल्यूशन प्रोफेशनल मिस्टर पुरुषोत्तम बेहरा के हाथ में है। NCLAT से स्टे हटने के बाद अब 'कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स' (CoC) पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रही है। निवेशकों के लिए मुख्य रिस्क यह है कि अगर कोई सफल रेजोल्यूशन प्लान फाइनल नहीं हुआ, तो एसेट्स का लिक्विडेशन हो सकता है। फिलहाल निवेशकों को NCLT की अगली सुनवाई और CoC की बैठकों के अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।
