SIP Industries ने अपनी 36वीं AGM 30 सितंबर, 2026 को बुलाई है। कंपनी भारी वित्तीय संकट से जूझ रही है और ऑडिटर्स ने 'गोइंग कंसर्न' को लेकर चेतावनी दी है।
अस्तित्व बचाने की रणनीति: SIP Industries की 36वीं AGM
नेट लॉस: ₹0.7168 करोड़ | संचित घाटा: ₹6.0071 करोड़
SIP Industries Limited ने अपनी 36वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 30 सितंबर, 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बुलाने का ऐलान किया है। यह बैठक कंपनी के लिए निर्णायक है, क्योंकि फिलहाल कंपनी का कामकाज बंद है और BSE पर इसके शेयरों की ट्रेडिंग सस्पेंडेड है।
क्यों है यह बैठक अहम?
ऑडिटर M/s Murali & Venkat ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कंपनी की नेट वर्थ पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। अब कंपनी इसे उबारने के लिए मैनेजमेंट के कर्ज को इक्विटी में बदलने की योजना बना रही है। इसके तहत मैनेजिंग डायरेक्टर Samiayya Arularasan और होल-टाइम डायरेक्टर Natesan Kameshwaron से लिए गए लोन को ₹10 प्रति शेयर के भाव पर इक्विटी में बदला जाएगा।
क्या बदलेगा?
बोर्ड ने Mrs. Bhageerathi को नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, कंपनी BSE से अपना सस्पेंशन हटाने के लिए भी प्रयास कर रही है। बैलेंस शीट को ठीक करने के लिए की-डायरेक्टर्स के साथ ₹10 करोड़ और ₹5 करोड़ तक के ट्रांजेक्शन के प्रस्ताव पर शेयरहोल्डर्स वोट करेंगे।
निवेशकों के लिए जोखिम
सबसे बड़ा खतरा ऑडिटर्स की 'गोइंग कंसर्न' चेतावनी है। फिलहाल कोई बिजनेस एक्टिविटी न होने के कारण कंपनी की वैल्यूएशन पर दबाव है। जब तक BSE से सस्पेंशन हटता नहीं, निवेशकों का पैसा फंसा रहेगा और लिक्विडिटी का बड़ा जोखिम बना रहेगा।
