Ravi Kumar Distilleries के लिए FY26 चुनौतीपूर्ण रहा है, जहाँ कंपनी का रेवेन्यू **26.8%** गिरकर **₹57.02 करोड़** पर आ गया है। कंपनी गंभीर लिक्विडिटी संकट और SEBI व PMLA की जांच के घेरे में है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
FY26 में कंपनी का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है। रेवेन्यू में भारी गिरावट के बीच, नेट प्रॉफिट ₹13.68 लाख पर रहा है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹13.22 लाख के मुकाबले मामूली बढ़त है। यह फ्लैट प्रॉफिट कंपनी की गहरी वित्तीय समस्याओं को छिपा नहीं पा रहा है।
क्यों है चिंता की बात?
ऑडिटर्स ने कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) जारी किया है। इसके पीछे मुख्य कारण ₹29 करोड़ की विवादित संपत्तियों की रिकवरी को लेकर अनिश्चितता है। इसके अलावा, कंपनी पर ₹2.66 करोड़ की वैधानिक बकाया राशि (Statutory Dues) भी है, जिसमें प्रोविडेंट फंड (PF) और ESI का पैसा शामिल है। लिक्विडिटी की कमी के कारण कंपनी लिस्टिंग फीस भरने और कंपनी सेक्रेटरी नियुक्त करने जैसे बुनियादी दायित्वों को पूरा करने में भी संघर्ष कर रही है।
कानूनी पचड़ों में फंसी कंपनी
कंपनी का अतीत विवादों से भरा रहा है। पूर्व मैनेजमेंट पर IPO फंड के गलत इस्तेमाल के आरोप हैं, जिसकी जांच SEBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) PMLA के तहत कर रहे हैं। मामला अभी NCLT और सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है। निवेशकों के लिए फिलहाल ये जांच और ऑडिट रिपोर्ट के 'रेड फ्लैग्स' बड़ी चेतावनी हैं।
