Rattanindia Enterprises ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट लॉस पिछले साल के **₹396.56 करोड़** से घटकर **₹24.03 करोड़** रह गया है, जबकि इस बार कुल रेवेन्यू **₹2,061.67 करोड़** दर्ज किया गया है।
मुनाफे की राह या कानूनी बाधा?
कंपनी के ऑपरेशनल फ्रंट पर स्थिति संभलती दिख रही है, जिसका सबूत घाटे में आई बड़ी गिरावट है। हालांकि, निवेशकों के लिए चिंता की बात कंपनी से जुड़े कानूनी विवाद हैं। फिलहाल कंपनी की सब्सिडियरी Throttle Aerospace Systems में हिस्सेदारी बढ़ाने को लेकर माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स का विवाद NCLT में चल रहा है।
इसके अलावा, Canara Bank द्वारा दायर एक अपील भी NCLAT में लंबित है, जो एक पुरानी खारिज की गई इन्सॉल्वेंसी एप्लीकेशन से जुड़ी है। मैनेजमेंट का दावा है कि ये कानूनी चुनौतियां उनके पक्ष में सुलझेंगी, लेकिन न्यायिक फैसलों की अनिश्चितता बनी हुई है।
नई चुनौतियां और बदलाव
लंबी अवधि के रिस्क पर नजर डालें, तो End-of-Life Vehicles (ELV) Rules 2025 और Battery Waste Management Rules 2022 जैसे नए सरकारी नियमों के चलते वित्तीय देनदारियों का बोझ बढ़ सकता है, जिसका सही आकलन अभी कंपनी ने नहीं किया है।
इसके साथ ही, RattanIndia Power Limited (RPL) के अकाउंटिंग स्ट्रक्चर में भी बदलाव किया गया है। 25 मार्च 2026 से इसे एक 'एसोसिएट' के तौर पर रीक्लासिफाई किया गया है, जिससे कंपनी के पावर डिवीजन की परफॉरमेंस को देखने का नजरिया बदल गया है।
