Rajnish Wellness के लिए FY26 का फाइनेंशियल ईयर काफी मुश्किल भरा रहा है। कंपनी ने **₹6.29 करोड़** का नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि पिछले साल कंपनी मुनाफे में थी। बढ़ती लागत और गवर्नेंस से जुड़ी कमियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
मुनाफे से नुकसान का सफर
Rajnish Wellness के फाइनेंशियल रिजल्ट्स ने निवेशकों को निराश किया है। कंपनी ने मार्च 2026 को समाप्त फाइनेंशियल ईयर में ₹6.29 करोड़ का नेट लॉस रिपोर्ट किया है, जो पिछले साल के ₹0.17 करोड़ के मुनाफे के मुकाबले एक बड़ा झटका है। हालांकि, कंपनी की टोटल इनकम बढ़कर ₹142.58 करोड़ हो गई है, लेकिन खर्चों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने मार्जिन को पूरी तरह खत्म कर दिया। कंपनी का कुल खर्च ₹150.99 करोड़ तक पहुंच गया, जिसमें से ₹141.17 करोड़ केवल सामान की खरीद (procurement cost) पर खर्च हुए।
गवर्नेंस और ऑडिट पर गंभीर सवाल
फाइनेंशियल खराबियों के अलावा, कंपनी में गवर्नेंस की गंभीर कमियां भी सामने आई हैं। स्टेट्यूटरी ऑडिटर्स के अनुसार, कंपनी सेक्शन 138 के तहत अनिवार्य इंटरनल ऑडिट सिस्टम लागू करने में विफल रही है। इसके अलावा, BSE ने कंपनी पर कई नियमों के उल्लंघन के लिए पेनाल्टी लगाई है, जिसमें रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन (Reg 23(9)), डिविडेंड डिस्क्लोजर (Reg 43A) और रिस्क मैनेजमेंट कमेटी का गठन न करना शामिल है।
आगे का रास्ता और मैनेजमेंट का प्लान
मुश्किलों के बीच, मैनेजमेंट ने FY 2026-2027 के लिए रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन की नई लिमिट्स प्रस्तावित की हैं। इसमें मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह के लिए ₹25 करोड़ और CFO मिहिर पटवा के लिए ₹10 करोड़ तक की अनसिक्योर्ड लोन फैसिलिटी शामिल है। कंपनी का कहना है कि अब उनका पूरा फोकस प्रोक्योरमेंट ऑप्टिमाइजेशन और वर्किंग कैपिटल सुधारने पर है ताकि मुनाफे की स्थिति में वापस लौटा जा सके।
निवेशकों के लिए चेतावनी
बढ़ती लागत का कैश फ्लो पर क्या असर होगा और प्रस्तावित लोन का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा, इस पर निवेशकों को बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। BSE की लगातार पेनाल्टी यह बताती है कि अनुपालन (compliance) संबंधी रिस्क अब भी बने हुए हैं, जो स्टॉक के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकते हैं।
