Rajeswari Infrastructure के रिजॉल्यूशन प्रोसेस को लेकर NCLT की चेन्नई बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। कंपनी को अपना रिजॉल्यूशन प्लान पूरा करने के लिए **90 दिन** की मोहलत मिल गई है, जिससे लेनदारों को बड़ी राहत मिली है।
NCLT का सख्त रुख और कंपनी को मिली राहत
NCLT चेन्नई बेंच ने रिजॉल्यूशन प्रोसेस में चल रही देरी को देखते हुए एक अहम फैसला लिया है। कंपनी ने 119 दिन की छूट की मांग की थी, जिसे ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया, लेकिन रिजॉल्यूशन प्लान को अमलीजामा पहनाने के लिए 90 दिन का अतिरिक्त समय दे दिया है। यह प्लान मूल रूप से 13 जनवरी, 2026 को स्वीकृत किया गया था।
एसेट सेल और लेनदारों का सेटलमेंट
इस ऑर्डर का मुख्य फोकस नॉन-कोर एसेट्स को बेचकर बकाया चुकाना है। Intec Capital Ltd और Religare Finvest Ltd का इन एसेट्स पर एक्सक्लूसिव चार्ज है। NCLT ने निर्देश दिया है कि SRA (Successful Resolution Applicant) इन संपत्तियों को बेचे और प्राप्त राशि सीधे इन क्रेडिटर्स के खातों में जमा करे। पेमेंट मिलने के बाद, इन लेनदारों को प्रॉपर्टीज से अपना लीन (lien) हटाना होगा।
अन्य कानूनी पेंच
प्रॉपर्टी टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से की गई अटैचमेंट की कार्रवाई पर ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा अलग से सुलझाया जाएगा, क्योंकि विभाग ने CIRP के शुरुआती दौर में अपना दावा पेश नहीं किया था।
निवेशकों के लिए संकेत
यह फैसला रिजॉल्यूशन प्रक्रिया में एक स्पष्ट डेडलाइन तय करता है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी इन 90 दिनों के भीतर नॉन-कोर एसेट्स बेचकर अपने वादे को कैसे पूरा करती है और बकाया लोन की स्थिति क्या रहती है।
