Rajesh Exports ने वित्त वर्ष 2025-26 के शानदार नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी का मुनाफा **₹111.54 करोड़** तक पहुंच गया है। कंपनी पूरी तरह से कर्ज-मुक्त (Debt-Free) है, लेकिन ऑडिट रिपोर्ट में ERP सिस्टम की खामियों और बैंकों के साथ चल रहे कानूनी विवाद निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नज़र
Rajesh Exports Ltd (REL) ने अपनी 32वीं वार्षिक रिपोर्ट में मजबूत आय के आंकड़े पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा पिछले साल के ₹94.89 करोड़ से बढ़कर इस बार ₹111.54 करोड़ हो गया है। वहीं, कुल आय में भारी उछाल दर्ज किया गया है और यह ₹7,78,716 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। हालांकि, बोर्ड ने चालू वित्त वर्ष के लिए किसी भी डिविडेंड की घोषणा नहीं की है। फिलहाल कंपनी की बैलेंस शीट काफी मजबूत है और उसके पास ₹2,615.22 करोड़ की नकदी मौजूद है।
क्यों है चिंता? (Auditor's Flag & Risks)
कंपनी ग्लोबल रिटेल और ई-कॉमर्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है, लेकिन ऑडिटर्स ने कंपनी के ERP सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मौजूदा सिस्टम में 'एडिट लॉग्स' और 'ऑडिट ट्रेल' का अभाव पाया गया है, जिसे कंपनी अब ठीक करने की दिशा में काम कर रही है।
इसके अलावा, कानूनी मोर्चे पर भी कंपनी के सामने बड़ी चुनौतियां हैं:
- Canara Bank: डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) में बकाया भुगतान को लेकर विवाद चल रहा है।
- MCX: बॉम्बे हाई कोर्ट में कथित तौर पर खातों के दुरुपयोग का मामला विचाराधीन है।
- Leadership: कंपनी के सेक्रेटरी विकास कुमार खेतान के इस्तीफे के बाद से नेतृत्व में बदलाव का दौर चल रहा है।
आगे की राह
निवेशकों को अब कंपनी के नए ERP सॉफ्टवेयर की लॉन्चिंग और अदालती मामलों के फैसलों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि यही भविष्य में स्टॉक की दिशा तय करेंगे।
