Radhagobind Commercial Ltd के लिए एक बड़ी खबर है। कंपनी की 12वीं Committee of Creditors (CoC) मीटिंग में Resolution Plan को औपचारिक मंजूरी मिल गई है, जिससे कंपनी के इन्सॉल्वेंसी संकट से बाहर निकलने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत चल रही प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। 4 नवंबर, 2026 को आयोजित 12वीं CoC मीटिंग में क्रेडिटर्स ने कंपनी के रिवाइवल प्लान पर अपनी मुहर लगा दी है। मीटिंग की अध्यक्षता Resolution Professional Mr. Najeeb T P ने की। इस दौरान Section 30(4) के तहत प्लान को मंजूरी दी गई और साथ ही CIRP कॉस्ट, इंटरिम फाइनेंस और अन्य रेगुलेटरी फीस को भी पास कर दिया गया।
निवेशकों के लिए क्यों है यह अहम?
यह कदम इस बात का संकेत है कि लेंडर्स अब कंपनी के कर्ज को सुलझाने के लिए एक सहमति पर पहुंच गए हैं। इससे कंपनी के पूरी तरह लिक्विडेट होने का खतरा कम हो गया है और यह ऑपरेशनल पटरी पर लौटने की दिशा में एक बड़ा संकेत है। अब एक 'मॉनिटरिंग कमिटी' बनाई जाएगी, जो इस पूरे प्लान के कार्यान्वयन पर नजर रखेगी।
आगे की राह और जोखिम
मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं है कि सभी अड़चनें खत्म हो गई हैं। अभी भी अंतिम कानूनी मंजूरी बाकी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया में अक्सर भारी कैपिटल रीस्ट्रक्चरिंग होती है, जिसका सीधा असर पुराने शेयरहोल्डर्स पर पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सलाह है कि वे BSE पर आने वाली आधिकारिक फाइलिंग पर नजर रखें, ताकि प्लान के लागू होने की टाइमलाइन और कानूनी आदेशों की सटीक जानकारी मिल सके।
