Pulsar International ने FY 2025-26 के लिए शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, जो बढ़कर **₹128.79 करोड़** पहुंच गया है। हालांकि, बढ़ते खर्चों के कारण नेट प्रॉफिट लुढ़क कर मात्र **₹0.10 करोड़** रह गया है, जबकि ऑडिटर की सख्त टिप्पणियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का हाल
Pulsar International के लिए यह फाइनेंशियल ईयर मिला-जुला रहा है। कंपनी का टॉप-लाइन रेवेन्यू पिछले साल के ₹31.17 करोड़ से उछलकर ₹128.79 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है, जो कि 313% की भारी बढ़ोतरी है। लेकिन, दूसरी तरफ नेट प्रॉफिट का हाल खराब है, जो पिछले साल के ₹1.77 करोड़ से घटकर महज ₹0.10 करोड़ पर सिमट गया है। इसकी मुख्य वजह ऑपरेशनल कॉस्ट में आई भारी तेजी है।
ऑडिटर की चिंताजनक टिप्पणियां (Auditor Concerns)
निवेशकों को कंपनी की बैलेंस शीट पर ध्यान देने की जरूरत है। ऑडिटर ने गंभीर सवाल उठाए हैं:
- इन्वेंट्री का अभाव: मैनेजमेंट ₹18.63 करोड़ की इन्वेंट्री का कोई सबूत पेश नहीं कर पाया है।
- बकाया पेमेंट: ₹4.24 करोड़ के ट्रेड रिसीवेबल्स और ₹1.09 करोड़ के पेबल्स बरसों से पेंडिंग हैं।
- Audit Trail की कमी: अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में 'ऑडिट ट्रेल' फीचर पूरे साल एक्टिव नहीं था, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
राइट्स इश्यू और मैनेजमेंट बदलाव
कंपनी ने हाल ही में ₹36 करोड़ जुटाने के लिए राइट्स इश्यू पेश किया था, जिसके तहत 35.69 करोड़ शेयर ₹1 की कीमत पर जारी किए गए। ये शेयर जनवरी 2026 से BSE पर ट्रेड कर रहे हैं। मैनेजमेंट में बड़े फेरबदल के तहत अक्टूबर 2025 में अरविंदकुमार परमार को मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया। साथ ही, मेसर्स नीरव एस. शाह एंड कंपनी को नया वैधानिक ऑडिटर बनाया गया है।
अब निवेशकों के लिए क्या है खास?
कंपनी के कुल एसेट्स बढ़कर ₹108.10 करोड़ हो गए हैं, लेकिन ऑडिटर की आपत्तियों का समाधान होना अभी बाकी है। निवेशकों को कंपनी द्वारा इन्वेंट्री के सबूत देने और बकाया पैसों की रिकवरी पर खास नजर रखनी चाहिए ताकि बैलेंस शीट की सच्चाई सामने आ सके।
