Priority Jewels Limited ने सितंबर तिमाही के लिए मॉनिटरिंग एजेंसी की रिपोर्ट जारी की है। एजेंसी ने फंड के सही इस्तेमाल की पुष्टि की है, लेकिन कंपनी की कुछ प्रक्रियात्मक खामियों पर सवाल भी उठाए हैं।
फंड का स्टेटस
Priority Jewels Ltd ने अपनी ताजा रिपोर्ट में खुलासा किया है कि IPO और प्री-IPO से जुटाए गए कुल ₹107.18 करोड़ में से ₹97.32 करोड़ का इस्तेमाल किया जा चुका है। अभी कंपनी के पास करीब ₹9.85 करोड़ की अन-यूटिलाइज्ड राशि बची हुई है।
CARE Ratings की अहम टिप्पणियाँ
मॉनिटरिंग एजेंसी CARE Ratings ने अपनी जांच में तीन मुख्य बातें सामने रखी हैं:
- फंड कमिंग्लिंग (Fund Commingling): एजेंसी ने पाया कि मॉनिटरिंग अकाउंट और कैश क्रेडिट (CC) खातों के बीच फंड का आदान-प्रदान हुआ है। कंपनी का कहना है कि यह वर्किंग कैपिटल डिमांड लोन (WCDL) की रिकवरी के लिए जरूरी था।
- देरी से बोर्ड अप्रूवल: कंपनी ने प्री-IPO फंड का इस्तेमाल जनरल कॉर्पोरेट पर्पस के लिए बोर्ड से मंजूरी मिलने से पहले ही कर लिया था, जिसे बाद में 4 सितंबर, 2026 को बोर्ड द्वारा रेटिफाई (Ratify) किया गया।
- डिस्क्लोजर का मामला: कंपनी ने एक एडेंडम जारी कर स्पष्ट किया कि कुछ फंड का इस्तेमाल पहले ही हो चुका था, जो प्रोस्पेक्टस में अपडेट नहीं था।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
राहत की बात यह है कि कंपनी ने IPO के मुख्य उद्देश्यों, जैसे कि कर्ज चुकाना, को पूरा किया है। इसमें से ₹67.12 करोड़ वर्किंग कैपिटल लोन को चुकाने में खर्च किए गए हैं। हालांकि, प्रक्रियात्मक खामियों और डिस्क्लोजर में देरी के चलते निवेशकों को आने वाले बोर्ड अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए कि कैसे बाकी बचे ₹9.85 करोड़ का इस्तेमाल किया जाता है।
