Pan Electronics India ने FY26 के नतीजों में घाटे को घटाकर **₹2.09 करोड़** पर ला दिया है, जो पिछले साल **₹3.74 करोड़** था। हालांकि, कंपनी की कुल रेवेन्यू घटकर **₹3.33 करोड़** रह गई है और अब कंपनी कई रेगुलेटरी अनुपालन मुद्दों से घिरी हुई है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का लेखा-जोखा
कंपनी ने बीते फाइनेंशियल ईयर में अपने ऑपरेशंस में सुधार के संकेत दिए हैं, जिससे नेट लॉस में कमी आई है। हालांकि, रेवेन्यू में आई गिरावट चिंता का विषय है, जो पिछले साल ₹4.83 करोड़ के मुकाबले गिरकर ₹3.33 करोड़ रह गई है। कंपनी ने अब अपनी आगामी 43वीं AGM जो 28 सितंबर, 2026 को होने वाली है, उसमें कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाकर ₹100 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा है।
ऑडिट में सामने आई बड़ी खामियां
स्टैच्यूटरी ऑडिटर ने कंपनी की अकाउंटिंग प्रक्रिया पर 'क्वालीफाइड ओपिनियन' दिया है। कंपनी पर IND AS 116 (लीज) और IND AS 109 (फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स) के मानकों का पालन न करने के गंभीर आरोप हैं। मैनेजमेंट ने इसके पीछे डेटा और संसाधनों की कमी का हवाला दिया है।
रेगुलेटरी रिस्क और कानूनी पचड़े
सेक्रेटेरियल ऑडिट में दो मुख्य उल्लंघन सामने आए हैं:
- Companies Act, 2013 की धारा 180(1)(c): बिना शेयरधारकों की मंजूरी के कर्ज की सीमा पार करना।
- धारा 73 का उल्लंघन: M/s Gemini Infrastructures से लिए गए असुरक्षित लोन को लेकर नियम तोड़ने का मामला।
निवेशकों के लिए अब 28 सितंबर की AGM बेहद महत्वपूर्ण होगी, जहां यह साफ होगा कि क्या शेयरधारक कर्ज बढ़ाने के इस प्रस्ताव को मंजूरी देंगे और मैनेजमेंट इन गंभीर अनुपालन संबंधी चिंताओं का क्या जवाब देता है।
