Newever Trade Wings के लिए फाइनेंशियल ईयर **2026** मुश्किल भरा रहा है। कंपनी ने साल भर में शून्य कमाई की है और नेट लॉस **₹52.18 लाख** पर पहुंच गया है। अब कंपनी अपनी डिलिस्टिंग की समस्या को सुलझाने के लिए **29 सितंबर, 2026** को होने वाली अपनी AGM में नए बोर्ड और ऑडिटर की नियुक्ति की तैयारी कर रही है।
फाइनेंशियल संकट और चुनौतियों का दौर
Newever Trade Wings के लिए यह फाइनेंशियल ईयर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। कंपनी ने FY 2025-26 में अपना ऑपरेशनल रेवेन्यू शून्य दर्ज किया है, जबकि पिछले साल का नेट लॉस ₹6.61 लाख था, जो अब बढ़कर ₹52.18 लाख हो गया है। कंपनी पर कुल घाटा लगभग ₹23.47 करोड़ तक पहुंच चुका है।
क्या है कंपनी की रणनीति?
कंपनी अपनी 14वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 29 सितंबर, 2026 को आयोजित करेगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कंपनी में नए गवर्नेंस ढांचे को तैयार करना है। इसमें M/s. Lipika & Associates को स्टैट्यूटरी ऑडिटर नियुक्त करने, Mr. Manoj Batham को मैनेजिंग डायरेक्टर बनाने और तीन नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को बोर्ड में शामिल करने का प्रस्ताव है। कंपनी डिलिस्टिंग स्टेटस को हटाने के लिए BSE के साथ मिलकर काम कर रही है, जिसे Securities Appellate Tribunal (SAT) का निर्देश मिला है।
ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर खुलासे
स्टैट्यूटरी ऑडिट रिपोर्ट में कंपनी के कामकाज में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। ऑडिटर्स ने स्वीकार किया है कि वे 2015 और 2017 के पुराने रिकॉर्ड्स को वेरिफाई करने में असमर्थ रहे हैं, क्योंकि अकाउंटिंग रिकॉर्ड्स अधूरे हैं। साथ ही, कंपनी पर 'गोइंग कंसर्न' (कारोबार जारी रखने) को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम
फिलहाल कंपनी के पास कामकाज से कोई रेवेन्यू नहीं है, जो इसकी सॉल्वेंसी के लिए बड़ा जोखिम है। निवेशकों को BSE द्वारा डिलिस्टिंग हटाने के फैसले और कंपनी के नए मैनेजमेंट द्वारा पुरानी वित्तीय गड़बड़ियों को सुलझाने की दिशा में उठाए गए कदमों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।
