Mysore Paper Mills ने अपने ऑपरेशंस को प्राइवेट प्लेयर को लीज पर देने के लिए IDECK को ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त किया है। हालांकि, साल 2016 से 2025 तक के पेंडिंग ऑडिट्स के कारण कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति पर अभी भी बड़ा संकट मंडरा रहा है।
प्राइवेट प्लेयर को सौंपने की तैयारी
29 सितंबर, 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में Mysore Paper Mills ने अपने बिजनेस मॉडल में एक बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। कंपनी ने Infrastructure Development Corporation (Karnataka) Limited यानी IDECK को ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट बनाया है। इस नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य कंपनी के ऑपरेशंस को किसी निजी इकाई (private entity) को लीज पर देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है, जिससे कंपनी के कामकाज को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।
ऑडिट में 9 साल की देरी का संकट
यह फैसला भले ही रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता हो, लेकिन कंपनी की फाइनेंशियल सेहत पर अभी भी भारी सस्पेंस है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि 2015-16 के बाद से यानी 1 अप्रैल, 2016 से 31 मार्च, 2025 तक की बैलेंस शीट और फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स का ऑडिट अब तक नहीं हुआ है। पूरे 9 साल के ऑडिट का पेंडिंग होना कंपनी के गवर्नेंस और ट्रांसपेरेंसी पर बड़े सवाल खड़े करता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
मैनेजमेंट ने खुद माना है कि कंपनी का 'गोइंग कंसर्न' (going concern) स्टेटस एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। जब तक पिछले एक दशक के ऑडिटेड आंकड़े सामने नहीं आते, तब तक कंपनी की असल लायबिलिटीज और कर्ज का सही अंदाजा लगाना नामुमकिन है। लीज डील अभी अपनी शुरुआती स्टेज में है और किसी भी रेगुलेटरी या कानूनी अड़चन के कारण इसमें लंबा समय लग सकता है।
आगे क्या रखें नजर?
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि लीज एग्रीमेंट के लिए क्या टाइमलाइन तय होती है। साथ ही, 2016-2025 के पेंडिंग ऑडिट को पूरा करने के लिए कंपनी क्या कदम उठाती है, यह कंपनी की भविष्य की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण होगा।
