Msafe Equipments: IPO फंड के इस्तेमाल में बड़ी गड़बड़ी, गवर्नेंस पर उठे गंभीर सवाल

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Msafe Equipments: IPO फंड के इस्तेमाल में बड़ी गड़बड़ी, गवर्नेंस पर उठे गंभीर सवाल

Care Ratings ने Msafe Equipments के IPO फंड के इस्तेमाल में गंभीर खामियां पकड़ी हैं। इसमें फंड्स की हेराफेरी, जमीन अधिग्रहण में बिना बोर्ड मंजूरी के बदलाव और प्रोजेक्ट में देरी जैसे मामले शामिल हैं। अब इसकी डेडलाइन बढ़ाकर **31 मार्च, 2027** कर दी गई है।

फंड्स में गड़बड़ी का खुलासा

Care Ratings ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि Msafe Equipments ने IPO से जुटाए कुल ₹54.12 करोड़ में से ₹46.71 करोड़ का इस्तेमाल किया है, जबकि ₹7.41 करोड़ अभी भी अनयूटिलाइज्ड (अइस्तेमाल) पड़े हैं। चिंता की बात यह है कि कंपनी ने IPO के पैसों को दूसरे ट्रांजेक्शन वाले अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिया, जिससे फंड्स की 'कॉमिंग्लिंग' (मिलावट) हुई है।

जमीन अधिग्रहण में धांधली

गवर्नेंस से जुड़े नियम तब टूटते दिखे जब कंपनी ने जमीन खरीदी, जबकि इसके लिए बोर्ड की मंजूरी बाद में ली गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खरीद समझौता 18 अप्रैल, 2026 को हो गया था, लेकिन बोर्ड का रिजोल्यूशन 11 मई, 2026 को पास किया गया। इतना ही नहीं, जमीन की लोकेशन और लागत भी शुरुआत में बताए गए ऑफर डॉक्यूमेंट से अलग पाई गई है।

प्रोजेक्ट्स में भारी देरी

कंपनी अपने तय शेड्यूल से काफी पीछे चल रही है:

  • मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी सेटअप में 173 दिनों की देरी।
  • वर्किंग कैपिटल के इस्तेमाल में 69 दिनों की देरी।

निवेशकों के लिए क्या है स्थिति?

अनयूटिलाइज्ड बैलेंस ₹7.41 करोड़ को ICICI Bank में फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा गया है, जिस पर 5.25% से 5.50% के बीच ब्याज मिल रहा है। अब कंपनी ने इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की डेडलाइन 31 मार्च, 2027 तक खिसका दी है। निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि मैनेजमेंट इन गवर्नेंस खामियों को कैसे ठीक करता है और क्या वे नई डेडलाइन तक काम पूरा कर पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.