Monind Ltd की 43वीं AGM में बड़ा खुलासा हुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का कामकाज पूरी तरह ठप रहा और रेवेन्यू शून्य रहा है। कंपनी पर कर्ज का भारी बोझ और नेगेटिव नेट वर्थ ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
भारी वित्तीय संकट में कंपनी
हाल ही में संपन्न हुई Monind Ltd की 43वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में कंपनी की बदहाली साफ नजर आई। कंपनी ने स्वीकार किया है कि पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान कोई भी कमर्शियल एक्टिविटी नहीं हुई है। कंपनी ने ₹0 का रेवेन्यू दर्ज किया है, जबकि खर्चों की वजह से ₹76.10 लाख का नेट लॉस हुआ है। पिछले साल के ₹253.75 लाख के मुकाबले घाटा कम जरूर हुआ है, लेकिन यह कंपनी के मूल कारोबार से नहीं, बल्कि 'अदर इनकम' के जरिए हुआ है।
ऑडिटर की कड़ी चेतावनी
कंपनी के ऑडिटर्स M/s O P Bagla & Co LLP ने कंपनी के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने 'Going Concern' का स्टेटस जारी करते हुए चेतावनी दी है कि कंपनी का अस्तित्व खतरे में है। कंपनी ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पहले ही बेच दी है और अब उसके पास काम करने का कोई जरिया नहीं बचा है। ऑडिटर्स ने ₹4,972.39 लाख के पेंडिंग ट्रेड पेबल्स (Trade Payables) को भी एक बड़ी चिंता का विषय बताया है।
बोर्ड में बड़े बदलाव
कंपनी अब होल-टाइम डायरेक्टर और CFO महेश कुमार शर्मा की पुनः नियुक्ति की मंजूरी ले रही है। हालांकि, गवर्नेंस के मोर्चे पर कंपनी में उथल-पुथल है। इस साल की शुरुआत में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स बबिका गोयल और उमेश कुमार शुक्ला ने इस्तीफा दे दिया था, जबकि फरवरी 2026 में संदीप कुमार को एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया था।
निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनी की अगली मैनेजमेंट कम्युनिकेशंस पर नजर रखें, क्योंकि फिलहाल कंपनी के पास कारोबार शुरू करने का कोई ठोस रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है।
