Mitshi India की FY26 रिपोर्ट ने निवेशकों को मायूस किया है। कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे में भारी गिरावट दर्ज की गई है, साथ ही Karronn Naresh Bajaj ने **₹15** प्रति शेयर के भाव पर ओपन ऑफर पेश किया है। इस बीच, ऑडिटर्स ने कंपनी की पारदर्शित पर सवाल उठाते हुए 'क्वालिफाइड ओपिनियन' दिया है, जिससे गवर्नेंस पर भी संकट गहरा गया है।
बिगड़ती वित्तीय सेहत
कंपनी के फाइनेंशियल ईयर FY26 के नतीजे काफी कमजोर रहे हैं। कंपनी का रेवेन्यू ₹4.58 करोड़ से घटकर ₹2.77 करोड़ रह गया है, वहीं नेट प्रॉफिट ₹3.56 लाख से गिरकर महज ₹0.0069 लाख पर आ गया है। हालांकि कंपनी अभी कर्ज-मुक्त है, लेकिन गिरता ऑपरेशनल स्केल निवेशकों के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।
गवर्नेंस पर सवाल
इस संकट के बीच सबसे बड़ी चिंता ऑडिटर्स की रिपोर्ट है। ऑडिटर्स ने कंपनी के कामकाज पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' जारी किया है। रिपोर्ट में एग्री-ट्रेड सेगमेंट में भारी-भरकम कैश ट्रांजेक्शन और पेबल्स व लोन के लिए थर्ड-पार्टी कन्फर्मेशन न मिलने का जिक्र है, जो कंपनी की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ओनरशिप में बदलाव और रणनीतिक फैसले
कंपनी अब बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। Karronn Naresh Bajaj ने कंपनी में 26% हिस्सेदारी खरीदने के लिए ₹15 प्रति शेयर के भाव पर ओपन ऑफर दिया है। इसके अलावा, बोर्ड में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। विकी महेंद्र अंजारिया की नियुक्ति के साथ-साथ गुरदीप सिंह और रेखा रानी नरानीवाल को स्वतंत्र निदेशक (Independent Directors) के तौर पर शामिल किया गया है।
मैनेजमेंट अब फॉरेन इन्वेस्टमेंट लिमिट को बढ़ाकर 49% करने और इंटर-कॉर्पोरेट लोन की सीमा को ₹100 करोड़ तक ले जाने की तैयारी कर रही है, जिस पर शेयरधारकों की मंजूरी का इंतजार है।
