Mehai Technology के निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। कंपनी ने **11.86 करोड़** अनएक्सरसाइज्ड कन्वर्टिबल वारंट्स को रद्द कर दिया है। निवेशकों द्वारा बकाया भुगतान न करने के कारण कंपनी ने उनके द्वारा जमा की गई **25%** राशि यानी **₹10.38 करोड़** को जब्त (forfeit) कर लिया है, जिससे मौजूदा शेयरहोल्डर्स को इक्विटी डाइल्यूशन से राहत मिली है।
वारंट लैप्स होने का पूरा मामला
Mehai Technology Limited ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि 11.86 करोड़ कन्वर्टिबल वारंट्स का 18 महीने का सब्सक्रिप्शन विंडो 30 अप्रैल, 2026 को समाप्त हो गया है। वारंट होल्डर्स द्वारा कुल सब्सक्रिप्शन राशि का 75% हिस्सा न चुका पाने के कारण, कंपनी ने SEBI ICDR रेगुलेशंस के तहत कड़ा कदम उठाया है। 1 मई, 2026 से प्रभावी इस फैसले के तहत, कंपनी ने पहले से जमा 25% रकम यानी ₹10.38 करोड़ को जब्त कर लिया है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
रिटेल निवेशकों के नजरिए से यह एक मिला-जुला अपडेट है। सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह है कि इससे संभावित इक्विटी डाइल्यूशन का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है, क्योंकि ये वारंट अब शेयर्स में नहीं बदलेंगे। साथ ही, ₹10.38 करोड़ की अतिरिक्त नकदी कंपनी के कैश रिजर्व को और मजबूत करेगी। हालांकि, दूसरी तरफ यह दर्शाता है कि संबंधित निवेशकों ने तय स्ट्राइक प्राइस पर निवेश को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया।
कैपिटल और आगे की राह
इस प्रक्रिया के बाद कंपनी की पेड-अप शेयर कैपिटल में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस फैसले से 27 अलग-अलग एंटिटीज प्रभावित हुई हैं, जिनमें Dynamic Services & Security Limited जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने अब इन शेयर्स को प्राप्त करने का अपना अधिकार खो दिया है।
अब निवेशकों की नजर कंपनी के आने वाले क्वार्टरली नतीजों पर है, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि यह जब्त की गई राशि बैलेंस शीट में किस तरह रिफ्लेक्ट होती है और क्या कंपनी अब नए फंड जुटाने की कोई योजना बनाती है।
