Meesho Ltd ने अपनी 11वीं AGM के नोटिस में एक जरूरी सुधार (Corrigendum) जारी किया है। कंपनी ने बोर्ड में नॉमिनेशन के नियमों को बदलते हुए फाउंडर्स के अधिकार तय किए हैं, जबकि इन्वेस्टर्स के लिए प्रस्तावित कुछ अधिकारों को हटा लिया है।
बोर्ड गवर्नेंस में बड़ा बदलाव
Meesho ने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के Article 122 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इस बदलाव का सीधा असर कंपनी के बोर्ड कंपोजिशन पर पड़ेगा। कंपनी ने पहले प्रस्तावित 'सिग्निफिकेंट इन्वेस्टर नॉमिनेशन राइट' को पूरी तरह से हटा दिया है और अब फाउंडर-सेंट्रिक गवर्नेंस पर फोकस किया है।
फाउंडर्स के लिए क्या है नया नियम?
प्रस्तावित Article 122(A) के तहत, फाउंडर्स Vidit Aatrey और Sanjeev Kumar तब तक बोर्ड में बने रह सकते हैं और खुद को नॉमिनेट कर सकते हैं, जब तक उनके पास कंपनी की कम से कम 3% पेड-अप इक्विटी है। यह कदम कंपनी के भविष्य में उनकी पकड़ को मजबूत बनाने के लिए है।
गवर्नेंस और सुरक्षा के उपाय
बोर्ड ने गवर्नेंस को पारदर्शी बनाने के लिए कुछ कड़े नियम तय किए हैं:
- फाउंडर्स के इन अधिकारों को हर 5 साल में एक स्पेशल रेजोल्यूशन (Special Resolution) के जरिए रिन्यू करवाना होगा।
- बोर्ड के सभी नॉमिनी को 'फिट एंड प्रॉपर' (Fit and Proper) टेस्ट से गुजरना होगा, जिसे नॉमिनेशन एंड रेम्युनरेशन कमिटी द्वारा देखा जाएगा।
- लेंडर-अपॉइंटेड डायरेक्टर्स के लिए कंपनी एक्ट के तहत रोटेशन पॉलिसी लागू रहेगी।
आगे क्या होगा?
यह सभी बदलाव 18 सितंबर, 2026 को होने वाली 11वीं AGM में शेयरहोल्डर्स की वोटिंग के बाद ही लागू होंगे। इन्वेस्टर्स की नजर इस बात पर होगी कि क्या ये स्ट्रक्चरल बदलाव जरूरी बहुमत हासिल कर पाते हैं या नहीं।
