Luxury Time Ltd ने अपने IPO से मिले पैसों के इस्तेमाल की योजना में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने **₹10 करोड़** की राशि को वर्किंग कैपिटल से हटाकर सहायक कंपनियों और जॉइंट वेंचर्स में निवेश करने का फैसला किया है।
फंड का नया डेस्टिनेशन
कंपनी ने शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के बाद अपने IPO प्रोसीड्स के इस्तेमाल में बदलाव को औपचारिक रूप दे दिया है। अब ₹10 करोड़ का फंड वर्किंग कैपिटल की जगह नई रणनीतिक सब्सिडियरी और जॉइंट वेंचर्स बनाने के काम आएगा। इसके अलावा, कंपनी ने चार नए रिटेल स्टोर्स के लिए अपना बजट ₹2.82 करोड़ से बढ़ाकर ₹3 करोड़ कर दिया है।
क्यों लिया यह फैसला?
यह कदम कंपनी की प्रीमियम रिटेल मार्केट में पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। मैनेजमेंट का कहना है कि कई ग्लोबल लग्जरी ब्रांड्स अपनी अलग कॉर्पोरेट इकाई (Corporate Entity) के साथ काम करना पसंद करते हैं, न कि मूल कंपनी के जरिए। नई सब्सिडियरीज बनाने से इन अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स को ऑनबोर्ड करने में आ रही कानूनी और परिचालन बाधाएं दूर होंगी।
अनयूटिलाइज्ड फंड का क्या हुआ?
30 सितंबर, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के पास ₹18.73 करोड़ का अनयूटिलाइज्ड फंड (Unutilized Fund) बचा है। कंपनी ने इस पूरे फंड को Kotak Mahindra Bank की फिक्स्ड डिपॉजिट्स (FDs) में रखा है, जिस पर उन्हें 6.7% का सालाना ब्याज मिल रहा है। ये डिपॉजिट्स जनवरी 2027 से नवंबर 2027 के बीच मैच्योर होंगे।
निवेशकों के लिए नजरिया
हालांकि मॉनिटरिंग एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि फंड के इस्तेमाल में कोई विचलन (Deviation) नहीं है, फिर भी निवेशकों को अब कंपनी के नए रिटेल स्टोर्स के परफॉर्मेंस और नई सब्सिडियरी के जरिए होने वाले ब्रांड कॉन्ट्रैक्ट्स पर नजर रखनी चाहिए। अब पूरा फोकस इस बात पर होगा कि यह रणनीतिक बदलाव कंपनी के रेवेन्यू में कितनी तेजी लाता है।
