Lenskart Solutions को कस्टम विभाग से **₹13.17 करोड़** की डिमांड का नोटिस मिला है। यह मामला ऑप्टिकल फ्रेम्स के क्लासिफिकेशन (HSN) से जुड़ा है, जिसे लेकर कंपनी अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।
विवाद की जड़: HSN क्लासिफिकेशन
दिल्ली स्थित ऑफिस ऑफ द प्रिंसिपल कमिश्नर ऑफ कस्टम्स ने ₹13.17 करोड़ का डिमांड ऑर्डर जारी किया है। इसमें ₹6.59 करोड़ की ड्यूटी और ₹6.58 करोड़ की पेनाल्टी शामिल है। विवाद का मुख्य मुद्दा इम्पोर्टेड आई-फ्रेम्स का क्लासिफिकेशन है। कंपनी इन्हें HSN 9003 के तहत मानती है, जबकि कस्टम विभाग ने इसे HSN 9004 में री-क्लासिफाई कर दिया है, जिससे टैक्स का अंतर पैदा हुआ है।
कानूनी लड़ाई और कंपनी का रुख
Lenskart ने साफ किया है कि इस ऑर्डर का उनके कामकाज पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इसे पहले ही 'कंटिंजेंट लायबिलिटी' (Contingent Liability) के तौर पर दिखाया जा चुका है। कंपनी का तर्क है कि प्रोडक्ट की फंक्शनैलिटी और एक्सपर्ट लीगल सलाह के आधार पर उनका वर्गीकरण सही था।
आगे क्या होगा?
अभी इस डिमांड में 'ब्याज' (Interest) की रकम शामिल नहीं है, जो भविष्य में कंपनी पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। कंपनी ने अब इस ऑर्डर के खिलाफ अपील दायर करने का फैसला किया है। निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि कानूनी कार्यवाही का नतीजा क्या निकलता है और क्या इसमें कोई नया टैक्स जोखिम जुड़ता है।
