Le Lavoir Ltd में बड़ा कॉर्पोरेट ड्रामा देखने को मिला है। कंपनी के 45वें एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में शेयरहोल्डर्स ने दो इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स, अमित कुमार बेरा और सम्राट मंडल की फिर से नियुक्ति के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसके बाद दोनों को पद छोड़ना पड़ा है।
AGM के बाद बोर्ड में हलचल
45वीं एनुअल जनरल मीटिंग के बाद Le Lavoir Ltd के बोर्ड में दो बड़े पद खाली हो गए हैं। नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के तौर पर काम कर रहे अमित कुमार बेरा और सम्राट मंडल को शेयरहोल्डर्स का समर्थन नहीं मिल सका। 29 सितंबर, 2026 से यह बदलाव प्रभावी हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
कंपनी ने इन दोनों डायरेक्टर्स की री-अपॉइंटमेंट के लिए प्रस्ताव रखा था, जिसे M/s. Jitendra Parmar & Associates की स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट के अनुसार, शेयरहोल्डर्स ने आवश्यक बहुमत नहीं दिया। बोर्ड के प्रस्तावों का इस तरह खारिज होना एक दुर्लभ कॉर्पोरेट घटना है, जो मैनेजमेंट और निवेशकों के बीच मतभेद की ओर साफ इशारा करती है।
अब आगे क्या होगा?
इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स का बोर्ड से हटना सीधे तौर पर गवर्नेंस पर सवाल खड़े करता है। कंपनी के सामने अब SEBI और कंपनी एक्ट के नियमों का पालन करते हुए जल्द से जल्द खाली पदों को भरने की कानूनी बाध्यता है। निवेशकों को अब कंपनी की ओर से आने वाली नई फाइलिंग पर नजर रखनी होगी, ताकि यह पता चल सके कि बोर्ड का पुनर्गठन कैसे होगा और क्या इससे कंपनी की कॉर्पोरेट रणनीति में कोई बड़ा बदलाव आएगा।
निवेशकों के लिए रिस्क
इस घटनाक्रम के बाद बोर्ड की स्थिरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। निवेशकों को बोर्ड और शेयरहोल्डर्स के बीच की इस 'अनबन' पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इससे कंपनी की गवर्नेंस और रेगुलेटरी कंप्लायंस पर असर पड़ सकता है।
