Landmark Global Learning Limited ने अपनी FY26 की एनुअल रिपोर्ट में 'Notes to Accounts' जोड़कर इसे दोबारा फाइल किया है। कंपनी ने इस साल **₹7.31 करोड़** का नेट लॉस दर्ज किया है, जिसका मुख्य कारण कनाडा जैसे प्रमुख बाजारों में वीजा नियमों में हुए बड़े बदलाव हैं, जिससे कंपनी का रेवेन्यू **51%** गिर गया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
कंपनी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में रेवेन्यू ₹18.31 करोड़ रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले 51.27% की भारी गिरावट है। एक समय ₹13.13 करोड़ का मुनाफा कमाने वाली कंपनी अब ₹7.31 करोड़ के शुद्ध घाटे में है। इस मुश्किल दौर में बोर्ड ने कैपिटल बचाने के लिए किसी भी तरह का डिविडेंड न देने का फैसला लिया है।
क्यों आई यह नौबत?
कंपनी का पुराना नाम 'Landmark Immigration Consultants Limited' था। नाम बदलकर 'Landmark Global Learning' करने के बावजूद, कंपनी को ग्लोबल एजुकेशन सेक्टर में बढ़ती सख्ती और कड़े वीजा नियमों का सामना करना पड़ रहा है। कनाडा जैसे देशों में पढ़ाई के लिए बढ़ती फाइनेंशियल शर्तों और भू-राजनीतिक दबाव ने सीधे तौर पर कंपनी के बिजनेस पर चोट की है।
आगे की राह और चुनौतियां
कंपनी अब अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह बदलने पर काम कर रही है। चेयरमैन Mr. Jasmeet Singh Bhatia के नेतृत्व में, मैनेजमेंट का पूरा फोकस नए उभरते बाजारों में पैठ बनाने और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर है। निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या कंपनी अपनी निर्भरता को उन देशों से हटाकर नए गंतव्यों की ओर मोड़ने में कामयाब हो पाती है या नहीं।
