Jupiter Industries & Leasing का हाल बेहाल है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का रेवेन्यू शून्य रहा और **₹7.92 लाख** का नेट लॉस हुआ है। ऑडिटर्स ने कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
फाइनेंशियल रिपोर्ट का हाल
कंपनी ने अपनी 42वीं एनुअल जनरल मीटिंग में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान कंपनी का कामकाज पूरी तरह ठप रहा और उसे कोई रेवेन्यू नहीं मिला। कंपनी का कुल नेट लॉस ₹7.92 लाख दर्ज किया गया है, जबकि संचित घाटा (Accumulated Losses) बढ़कर ₹323.36 लाख तक पहुंच गया है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की नेटवर्थ -₹223.36 लाख हो गई है।
क्यों चिंता में हैं ऑडिटर्स?
ऑडिटर्स M/s. N N K & Co. ने कंपनी की भविष्य की कार्यक्षमता (Going Concern) पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा खतरा ₹70 लाख के मूल लोन पर ₹20,485.22 लाख का विवादित ब्याज है, जिसे कंपनी ने अपनी किताबों में जगह नहीं दी है।
गवर्नेंस और बोर्ड पर संकट
कंपनी 'Companies Act, 2013' के नियमों का पालन करने में विफल रही है और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति नहीं कर पाई है। मैनेजमेंट का तर्क है कि खराब फाइनेंशियल स्थिति के कारण कोई भी योग्य व्यक्ति बोर्ड में शामिल होने को तैयार नहीं है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
कंपनी के पास न तो कोई स्पष्ट रिवाइवल प्लान है और न ही ऑपरेशंस शुरू करने के संकेत। भारी-भरकम विवादित ब्याज और फंड की कमी के चलते यह स्टॉक निवेशकों के लिए एक बड़ा रिस्क बना हुआ है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या कंपनी में कोई नया कैपिटल इन्फ्यूजन (Capital Infusion) होगा या मैनेजमेंट बोर्ड को रीस्ट्रक्चर करने का कोई कदम उठाएगा।
