Jai Corp ने FY26 के लिए शानदार नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर **₹169.26 करोड़** हो गया है, साथ ही निवेशकों के लिए **₹5.50** प्रति शेयर डिविडेंड की घोषणा की गई है। हालांकि, कानूनी जांच और ऑडिट रिपोर्ट में खामियों के चलते निवेशकों के लिए जोखिम भी बना हुआ है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की पूरी तस्वीर
Jai Corp के लिए पिछला फाइनेंशियल ईयर मुनाफे के लिहाज से काफी अच्छा रहा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट जो FY25 में ₹66.46 करोड़ था, वह FY26 में उछलकर ₹169.26 करोड़ पर पहुंच गया है। वहीं कंपनी ने ₹514.34 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है। खुशियों को और बढ़ाते हुए बोर्ड ने ₹5.00 का स्पेशल डिविडेंड और ₹0.50 का फाइनल डिविडेंड देने का फैसला किया है। इसके अलावा, कंपनी ने अपना 'स्पिनिंग डिवीजन' आधिकारिक तौर पर बंद करने का निर्णय लिया है और संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया जारी है।
प्लास्टिक डिवीजन का दम, लेकिन कानूनी संकट का साया
जहां कंपनी के प्लास्टिक प्रोसेसिंग डिवीजन ने ₹68.33 करोड़ का अच्छा प्रॉफिट कमाया है, वहीं निवेशकों को बड़ी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों के बाद, कंपनी को CBI और ED की गहन जांच के दौर से गुजरना पड़ रहा है। प्रमोटरों के आवास और सहायक कंपनियों के ऑफिस पर हुई छापेमारी ने गवर्नेंस को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
ऑडिट रिपोर्ट में अनसुलझे सवाल
मामले में एक और बड़ा ट्विस्ट तब आया जब ऑडिटर्स ने कंपनी को 'क्वालिफाइड ओपिनियन' दिया। कंपनी अपनी सहयोगी फर्म Urban Infrastructure Holdings Private Limited के फाइनेंशियल डेटा को स्पष्ट करने में नाकाम रही है। इसके अलावा, ₹21.47 करोड़ के इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट के रिकवर होने पर भी ऑडिटर्स ने सवाल उठाए हैं।
निवेशकों के लिए आगे की राह
फिलहाल, निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। CBI और ED की जांच के नतीजे कंपनी के फ्यूचर और प्रमोटर स्टेबिलिटी पर गहरा असर डाल सकते हैं। इसके साथ ही, बैलेंस शीट में फंसी बकाया राशि की रिकवरी पर भी नजर बनाए रखना जरूरी है।
