JSW Cement को बड़ी कानूनी जीत मिली है। Orissa High Court ने 2020 के उस संशोधन को खारिज कर दिया है जिसने कंपनी के SGST रिफंड को रोक दिया था। कोर्ट ने अधिकारियों को **4 हफ्ते** के भीतर ब्याज समेत सभी बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया है।
कानूनी जीत और रिफंड की उम्मीद
Orissa High Court ने JSW Cement Limited की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें राज्य की 'Industrial Policy Resolution (IPR) 2015' में किए गए 2020 के संशोधन को चुनौती दी गई थी। इस संशोधन के जरिए सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए 1 जुलाई 2017 से SGST रिफंड को रोक दिया गया था, जिसे अब कोर्ट ने असंवैधानिक और मनमाना करार दिया है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
यह फैसला JSW Cement के लिए एक बड़े फाइनेंशियल बूस्ट की तरह है। कोर्ट ने 'Promissory Estoppel' के सिद्धांत को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार को अपनी औद्योगिक नीति के वादों का पालन करने का निर्देश दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि कंपनी का जो पैसा लंबे समय से अटका हुआ था, उसे ब्याज समेत वापस पाने का रास्ता अब खुल गया है।
अब आगे क्या?
अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कंपनी को 'Priority Sector' का दर्जा दिया जाए। साथ ही, अगले 4 हफ्ते के भीतर सभी पेंडिंग रिफंड क्लेम और उन पर बनता ब्याज जारी करने को कहा है। अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि क्या राज्य सरकार इस तय समय सीमा के भीतर भुगतान करती है या फिर आगे कोई कानूनी चुनौती पेश करती है।
