Interworld Digital ने अपना FY 2025-26 का सालाना रिपोर्ट पेश किया है, जिसमें कंपनी को **₹26.05 लाख** का नेट लॉस हुआ है। कंपनी अब कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेडिंग में उतरकर अपने कामकाज को दोबारा शुरू करने की योजना बना रही है।
फाइनेंशियल रिपोर्ट पर एक नजर
कंपनी की ओर से जारी डेटा के मुताबिक, इस फाइनेंशियल ईयर में ऑपरेशन्स से कोई रेवेन्यू नहीं हुआ है, जबकि खर्च ₹26.05 लाख रहा है। इस सुस्त परफॉर्मेंस के बीच, बोर्ड ने अब कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, जैसे मोबाइल और होम अप्लायंसेज की ट्रेडिंग में कदम रखने का फैसला किया है। इसके लिए कंपनी ₹25 करोड़ के रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शंस (RPTs) के लिए शेयरहोल्डर्स से मंजूरी मांग रही है।
गंभीर चुनौतियां और ऑडिट रिपोर्ट
कंपनी के लिए राह आसान नहीं है। ऑडिटर्स ने पुराने मैनेजमेंट के तौर-तरीकों पर कड़े सवाल उठाए हैं। कंपनी के पूर्व एमडी मिस्टर मनमोहन गुप्ता पर बिजनेस को अपने निजी हितों के लिए मोड़ने (Diversion) के आरोप लगे हैं, जिसकी जांच जारी है। इतना ही नहीं, कंपनी पर ₹1.9 करोड़ के पुराने सरकारी बकाया (Statutory Dues) भी लंबित हैं।
आगे क्या होगा?
शेयरहोल्डर्स की निगाहें अब 30 सितंबर, 2026 को होने वाली 31वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) पर टिकी हैं। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या कंपनी एसेट रिकवरी और लंबित कानूनी विवादों को हल कर पाती है या नहीं। इसके अलावा, ₹25 करोड़ के नए फंड का उपयोग कैसे किया जाता है, यह भी कंपनी की भविष्य की दिशा तय करेगा।
