Innovative Ideals and Services (India) Ltd ने सितंबर 2026 छमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू घटकर **₹0.09 करोड़** रह गया है, जबकि नेट लॉस कम होकर **₹0.63 करोड़** पर आ गया है। हालांकि, ऑडिटर्स ने लगातार नौवीं बार इन्वेंट्री वैल्यूएशन पर सवाल उठाए हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का हाल
कंपनी ने सितंबर 2026 को समाप्त हुई छमाही के लिए अपने आंकड़े पेश किए हैं। पिछले साल की समान अवधि के ₹0.53 करोड़ के मुकाबले इस बार रेवेन्यू गिरकर मात्र ₹0.09 करोड़ रह गया है। हालांकि, कंपनी ने अपने नेट लॉस को कंट्रोल करने में कामयाबी पाई है। पिछले साल इसी अवधि में घाटा ₹4.54 करोड़ था, जो अब घटकर ₹0.63 करोड़ पर आ गया है। इस दौरान कंपनी का EPS (Earnings Per Share) -0.55 रहा।
क्यों है चिंता की बात?
नतीजों के साथ-साथ गवर्नेंस से जुड़ी बड़ी चिंता भी सामने आई है। कंपनी के स्टेट्यूटरी ऑडिटर, Keyur Shah & Associates ने इन्वेंट्री वैल्यूएशन को लेकर 'Qualified Opinion' जारी किया है। बैलेंस शीट में इन्वेंट्री को ₹0.50 करोड़ पर दिखाया गया है, जिसे सिर्फ 'कॉस्ट' पर वैल्यू किया गया है, जबकि कंपनी एक्ट, 2013 के सेक्शन 133 के तहत इसे 'नेट रियलाइजेबल वैल्यू' और 'कॉस्ट' में से जो कम हो, उस पर होना चाहिए था।
लगातार नौवीं बार सवाल
यह कोई पहली बार नहीं है, बल्कि लगातार नौवीं बार है जब ऑडिटर्स ने इन्वेंट्री वैल्यूएशन के तरीके पर आपत्ति जताई है। ऑडिटर्स का साफ कहना है कि उन्हें इस अकाउंटिंग गड़बड़ी के असर को मापने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिल पाए हैं।
आगे क्या नजर रखें?
निवेशकों को अब कंपनी मैनेजमेंट के रुख पर नजर रखनी चाहिए कि क्या वे इस पुरानी अकाउंटिंग समस्या को सुधारने के लिए कोई कदम उठाते हैं। इसके अलावा, कंपनी का कोर बिजनेस रेवेन्यू जेनरेट करने में काफी संघर्ष कर रहा है, जो भविष्य के लिए एक बड़ा चैलेंज है।
