Inditalia Refcon Ltd ने अपने FY26 एनुअल रिपोर्ट में सुधार करते हुए उसे दोबारा फाइल किया है। कंपनी लंबे समय से आर्थिक संकट में है, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसका शेयर साल 2002 से ही स्टॉक एक्सचेंज पर सस्पेंडेड है।
आंकड़ों पर एक नजर
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस बार ग्रॉस इनकम ₹31.84 लाख रही है, जबकि कंपनी को ₹2.02 लाख का नेट लॉस हुआ है। कंपनी का मैनेजमेंट अब लिस्टिंग कंप्लायंस और डीमैट की प्रक्रियाओं को दुरुस्त करने पर जोर दे रहा है, लेकिन अभी भी कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' स्थिति पर बड़े सवाल खड़े हैं।
क्या है पूरा मामला?
कंपनी ने FY26 की अपनी एनुअल रिपोर्ट में डायरेक्टर विपुल राजेंद्रभाई गांधी से जुड़ी गलत जानकारियों को सुधारा है। साथ ही, कंपनी ने घोषणा की है कि उसकी 40वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 28 सितंबर, 2026 को आयोजित की जाएगी। गौरतलब है कि पिछले पूरे साल के दौरान कंपनी ने कोई भी सक्रिय मैन्युफैक्चरिंग या ट्रेडिंग बिजनेस नहीं किया है।
मैनेजमेंट की आगे की रणनीति
मैनेजमेंट का पूरा फोकस अब NSDL और CDSL जैसे डिपॉजिटरीज के पुराने बकाये को क्लियर करने पर है। इसके लिए एक नया रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट भी नियुक्त किया गया है ताकि शेयरहोल्डिंग डेटा को रीकंसाइल किया जा सके। ये कदम BSE से ट्रेडिंग सस्पेंशन हटाने की अपील करने के लिए अनिवार्य हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks)
कंपनी ने खुद स्वीकार किया है कि SEBI के कई नियमों का पालन नहीं किया गया है, जिसमें अखबारों में फाइनेंशियल रिजल्ट्स प्रकाशित न करना भी शामिल है। बिजनेस मॉडल को लेकर भी काफी अनिश्चितता है। कंपनी अब 'रेफ्रिजरेटेड कंटेनर लीजिंग' और 'एक्सपोर्ट लॉजिस्टिक्स' के क्षेत्र में उतरने की योजना बना रही है, लेकिन इसकी सफलता पर अभी भी बड़ा संशय बना हुआ है।
